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खंगाले जा रहे ग्राम पंचायतों के खाते, सचिवों से मांगा भुगतान का विवरण

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बड़ौत के गुराना सभाखेड़ी गांव के बाहर लगा होर्डिंग। - फोटो : BARAUT
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कितना हुआ भुगतान और किसी रूप मेें दर्शाया के सवाल का मांगा गया जवाब
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जल्द ही पूरी आख्या तैयार कर सीडीओ को भेजी जाएगी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। गांवों के विकास लिए आए बजट में ग्राम प्रधानों के प्रचार के खेल की सत्यता परखने के लिए बुधवार को विभागीय अफसरों ने ग्राम पंचायतों के खाते खंगालने शुरू कर दिए है। साथ ही ग्राम सचिवों से भुगतान का विवरण मांगा जा रहा है। निर्देशित किया गया है कि देखा जाए कि कितना भुगतान हुआ है और भुगतान को किसी रूप मेें दर्शाया गया है। जल्द से जल्द इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
यह था मामला
जनपद में कुल 244 ग्राम पंचायतें है। इनमें शासन ने केन्द्रीय वित्त व राज्य वित्त से गत माह विकास कार्यों को कराने के लिए करीब 19 करोड़ की धनराशि भेजी थी। मगर, विकास कार्यों में लगाने के बजाए ग्राम पंचायतों के प्रवेश मार्गों पर ग्राम प्रधान/ प्रधान प्रतिनिधि के नाम पर राजनीतिक लोगों के फोटो, समर्थित पार्टी के रंग के साथ हार्दिक स्वागत करने और मतदाताओं का आभार जताने के नाम पर ही गांव में ही कई बड़े-बड़े साइन बोर्ड लगाकर करीब 1.10 करोड़ रुपये खर्च कर दिए है। नए होर्डिंग लगाने के नाम पर एक से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च कर दिए है जबकि पुरानों मरम्मत में लगभग 40 से 50 हजार रुपये व्यय किए है। कई गांवों में तो दो से तीन होर्डिंग लगे हुए है। मामला उजागर हुआ तो सीडीओ रंजीत सिंह ने इस संबंध में ग्राम पंचायतों को नोटिस भेजने के साथ-साथ बीडीओ को भी पत्र भेजकर दो दिनों के अंदर जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।
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होर्डिंग किसी भी प्रकार से जनहित के कार्य में नहीं
डीपीआरओ बनवारी सिंह ने बताया कि शासन ने गत माह केन्द्रीय वित्त से 13.13 करोड़ रुपये और राज्य वित्त से 6.12 करोड़ रुपये ग्राम पंचायत के खातों मेें भेजे थे। ग्राम प्रधान को केन्द्रीय व राज्य वित्त से गांव में होर्डिंग लगाने का कोई अधिकार नहीं है। क्योंकि गांव में लगाए गए होर्डिंग किसी भी प्रकार से जनहित के कार्य में नहीं है। यह बिल्कुल गलत है।
महिला प्रधान नहीं उनके प्रतिनिधियों के नाम के लगे होर्डिंग
शासन व प्रशासन भले ही नारी सशक्तिकरण के नारे का दम भरते हो, लेकिन जनपद में केन्द्रीय व राज्य वित्त की धनराशि से लगाए गए होर्डिंग में भी महिला प्रधानों को दरकिनार किया गया है। ज्यादातर होर्डिंग में या तो महिला ग्राम प्रधान के पति का फोटो लगा हुआ है या फिर ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि व राजनीतिक लोगों का। दो-चार ग्राम पंचायतों को छोड़कर कहीं पर भी महिला प्रधानों का फोटो नहीं लगाया गया है।
मेरियल टेस्टिंग सर्टिफिकेट तक नहीं
सड़क किनारे लगाए गए गए बड़े-बड़े होर्डिंग में लोक निर्माण विभाग के मानकों को भी दरकिनार किया गया है। होर्डिंग लगाने के लिए थ्री एम कंपनी के एमटीसी यानी मेरियल टेस्टिंग सर्टिफिकेट भी ज्यादातर ग्राम पंचायतों के पास नहीं है।
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ग्राम सचिवों से भुगतान का विवरण मांगा जा रहा है। साथ ही कर्मचारियों को ग्राम पंचायतों के खातों की जांच करने के लिए लगा दिया गया है। पूरी आख्या तैयार कर सीडीओ को रिपोर्ट भेजी जाएगी। - राहुल वर्मा, बीडीओ।
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