दोघट (बागपत)। एनजीटी के आदेश के बाद ईंट भट्ठे और अन्य औद्योगिक इकाइयों का संचालन बंद कराया है। गाजियाबाद, दिल्ली और एनसीआर में फैले प्रदूषण को कम करने के लिए कवायद की जा रही है, लेकिन जिले में बड़ी संख्या में संचालित कोल्हू भी वायु प्रदूषण फैला रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कुछ कोल्हू में ईंधन के तौर पर पुराने टायरों का इस्तेमाल किया जाता है, इसका जहरीला धुआं ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है।
हिंडन और कृष्णा नदी के बीच बसे चौगामा क्षेत्र पहले से ही नदियों में बह रहे दूषित पानी की मार झेल रहा है, ऊपर से अब वायु प्रदूषण का खतरा भी मंडराने लगा है। अकेले दोघट, टीकरी, पलड़ी, दाहा, बामनौली, मांगरौली, धनौरा-टीकरी, पुसार में लगभग एक सौ गन्ना कोल्हू वर्तमान समय में चल रहे हैं। इनकी चिमनियों से निकलने वाले धुएं से क्षेत्र में दिन प्रतिदिन प्रदूषण बढ़ रहा है। अकेले टीकरी में 50 के लगभग गन्ना कोल्हू होने के कारण यहां पर सबसे ज्यादा प्रदूषण फैल रहा है। एनजीटी ने आदेश जारी किए हैं, लेकिन कोल्हू पर सब बेअसर है। प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। ग्रामीण दिनेश, महेंद्र, विनोद, हरपाल, राजेंद्र, बिट्टू आदि ने बताया कि क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। एनजीटी ने क्षेत्र में वायु प्रदूषण फैला रहे कोल्हू पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
टायर जलाने से होता है नुकसान
दोघट। कोल्हू में ईंधन के लिए खोई या सूखी पत्तियां जलाई जाती है, लेकिन ईंधन की खपत अधिक होने के कारण कोल्हू में पुराने टायर भी झोंक दिए जाते हैं। इससे अधिक वायु प्रदूषण फैलता है।