बड़ौत। मोबाइल, ससुराल वालों की रोकटोक और आपसी समन्वय स्थापित न कर पाने के कारण दांपत्य जीवन बर्बाद हो रहे हैं। इसी वजह से ज्यादातर पति-पत्नी तलाक लेकर जिंदगी की राह अलग चुन रहे हैं। इसके लिए ये लोग महिला थाने को शॉर्टकट के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। महिला थाने और वूमेन सैल में काउंसलिंग को कोर्ट द्वारा मान्य किए जाने से ऐसे जोड़ों को जल्द तलाक मिल रहा है। इसी काउंसलिंग के कारण पिछले तीन साल में करीब 650 दंपतियों ने तलाक लिया है।
चार से अधिक बार काउंसलिंग होने के बाद दी जाती है सहमति
महिला थाना प्रभारी साक्षी सिंह व बड़ौत कोतवाली में स्थित पुलिस चौकी प्रभारी रूबी उपाध्याय का कहना है कि हमारा प्रयास रहता है कि कोई परिवार न टूटे, इसलिए ऐसे मामले में चार या उससे अधिक बार काउंसलिंग करायी जाती है। लेकिन जब दपंत्ति नहीं मानता तो उसके बाद उनकी सहमति पर ही तलाक दिया जाता है। जिसके बाद तलाक के लिए कोर्ट में आवेदन किया जाता है। काउंसलिंग होने के कारण कोर्ट दस्तावेजों को परखने के छह माह के भीतर फैसला सुना देता है। ऑर्डर महिला थाने में भी दिए जाते हैं ताकि बाद में कोई समस्या न हो। ध्यान देने योग्य है शादी के एक साल बीतने के बाद ही तलाक के लिए आवेदन किया जा सकता है।
मोबाइल व रोकटोक बन रही मुख्य वजह
तलाक ले चुके कुछ जोड़ों से जब बात की गई तो मुख्य वजह रोकटोक और मोबाइल का प्रयोग मुख्य रुप से सामने आया। जिसमें बताया गया कि अनावश्यक रूप से लड़की को ससुराल में दबाकर रखा जाता है और हर बात पर रोकटोक लगाई जाती है। वहीं पति और पत्नी के बीच फोन और व्हाट्अप आदि का ज्यादा प्रयोग करने और उसे लेकर पैदा हुए शक के मामले में भी सामने आए।
घरेलू हिंसा व दहेज उत्पीड़न के दर्ज हुए 1550 से अधिक मामले
पिछलें तीन सालों मेें महिला थाना बागपत में 1250 व बड़ौत कोतवाली में स्थित हुए महिला पुलिस चौकी में अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के करीब 300 केसों आ चुके है। जिनमे से करीब 650 मामलों में पंचायती समझौते के आधार पर कोर्ट में तलाक लिया गया।
कोर्ट के फैसले पर ही तलाक है मान्य
सीओ आलोक कुमार ने बताया कि जब तक कोर्ट से तलाक को मान्यता नहीं मिल जाती, तब तलाक कानूनी रूप से मान्य नहीं है। कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिसमें गणमान्य लोगों की पंचायत में हुए फैसले के आधार पर दंपति अलग-अलग होकर दूसरी शादी कर लेते हैं। नियम के अनुसार कोर्ट से लिया गया तलाक ही मान्य है।