बड़ौत (बागपत)। किसानों के मित्र कहे जाने वाले सारस पक्षी का अस्तित्व खतरे में है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 से अब तक मेरठ मंडल के छह जनपदों के अंतर्गत पड़ने वाली 18 रेंज में सारस की संख्या दो साल में 534 घट गई है। हैरानी की बात यह है कि बागपत में सारस की संख्या शून्य, हापुड़ में मात्र व गाजियाबाद मेें सारस की संख्या मात्र तीन रह गई है। मेरठ मंडल में अब मात्र 235 सारस ही बचे है। उधर, सरकार के निर्देशों पर वन विभाग इनकी सुरक्षा को लेकर सजग तो है, लेकिन खेतों में पड़ने वाली पेस्टीसाइड, नदियों में खनन व तालाबों पर हो रहे कब्जे के अलावा शिकारी इन पक्षियों के लिए काल बने हुए है।
प्रदेश में सारस को राज्य पक्षी का दर्जा
प्रदेश में सारस को राज्य पक्षी का दर्जा है। बावजूद इसके रोजाना सारस की संख्या घटती जा रही है। वन विभाग के अफसरों के अनुसार मेरठ मंडल में हापुड़, गाजियाबाद, मेेरठ, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर व बागपत जनपद आते है। हापुड़ में गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़, गाजियाबाद में मोदीनगर व गाजियाबाद, मेरठ में हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़, सरधना, रिठानी, मेरठ, बुलंदशहर में खुर्जा, गुलावटी, सियाना व बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर में सिकंदराबाद, गौतमबुद्वनगर, एनटीपीसी व बागपत में बड़ौत व बागपत यानी कुल 18 रेंज है।
सारस की खूबियां
1. प्रेम का प्रतीक सारस, सुरक्षा के लिए भी रहता है सतर्क : सारस प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह पक्षी अपने जीवन काल में मात्र एक बार जोड़ा बनाता है और जोड़ा बनाने के बाद जीवन भर साथ रहता है। यह रात्रि के समय एक सारस अपने साथियों की सुरक्षा को लेकर पहरेदारी करता है। पहरेदार सारस एक पंजे को नीचे रखता है। दूसरे पंजे में कंकड़ दबाकर ऊपर उठा लेता है। थकने पर दूसरे पंजे में कंकड़ उठा लेता है। नींद आने पर कंकड़ गिरने से अन्य सारस की नींद खुल जाती है और वह सचेत हो जाते हैं।
2. निरंतर भर सकता है उड़ान : सारस निरंतर उड़ान भरने वाला पक्षी है। इसका औसत भार 7.3 किलोग्राम होता है और लंबाई 173 सेंटीमीटर होती है। नर-मादा की अलग अलग कोई पहचान नहीं होती। माना यही जाता है कि जोड़े में मादा-नर की अपेक्षा छोटी दिखती है।
3. किसानों का मित्र है सारस : सारस किसानों का मित्र पक्षी भी कहा जाता है। यह फसलों में लगने वाले कीड़ों को खाकर फसलों को नष्ट होने से बचाता है। दलदली व नमी वाले स्थान इसे प्रिय हैं। इसकी आवाज काफी दूर तक सुनाई देती है। बावजूद इसके किसान खेतों में अंधाधुंध पेस्टीसाइड का प्रयोग कर सारस का काल बन रहा है।
4. छिछले पानी के समीप बनाते हैं घोंसला : वन दरोगा रविकांत चौधरी व वन रक्षक सुनील शर्मा ने बताया कि सारस अपना घोंसला छिछले पानी के आसपास ही बनाना पसंद करते हैं जहां हरे-भरे खेत, पेड़-पौधे, झाड़ियां तथा घास हो। मादा सारस एक बार में दो से तीन अंडे देती है। अंडों से बच्चों को बाहर निकले में 25 से 30 दिन का समय लगता है।
इस लिए पड़ा अस्तित्व पर खबर
1. सारस का धड़ल्ले से हो रहा शिकार : मेरठ मंडल के अंतर्गत आने वाली हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़, औखला पक्षी बिहार, गढ़मुक्तेश्वर, ब्रजघाट, नरोरा में सारस पक्षियों का बसेरा है। सुबह-शाम के समय जलाशयों के किनारे इन्हें देखा जा सकता है। सारस पक्षी लोगों के साथ-साथ शिकारियों को भी लुभाने लगे हैं। शिकारी इन पक्षियों का शिकार कर उन्हें महंगे दामों में बेच रहे हैं। इस पर अंकुश लगा पाने वन विभाग नाकाम साबित हुआ है।
2. खनन, कब्जों से घट रही सारस की संख्या : पर्यावरणविद संजय राणा का मानना है कि लगातार सारस की कम हो रही संख्या की सबसे बड़ी वजह तालाबों में कब्जे और नदियों में खनन है। नदियों किनारे सारस बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन दिन-रात मशीनों से बालू खनन करने पर इनका बसेरा नदियों से खत्म होता जा रहा है। साल-दर-साल खेत का दायरा सिमटने का भी सारस के निवास पर बुरा प्रभाव पड़ा है।
खेतों में पड़ने वाली अंधाधुुंध पेस्टीसाइड सारस की मौत का कारण बन रहा है। विभाग लगातार किसानों को रासायनों का कम से कम प्रयोग करने के लिए जागरूक कर रहा है। बताया कि सारस की सुरक्षा का इंतजाम किया जाएगा। इन पक्षियों का शिकार करते हुए कोई शिकारी पकड़ा गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। - गंगा प्रसाद, वन संरक्षक, मेरठ मंडल मेरठ।
ये है जनपदवार आंकड़े
जनपद वर्ष 2019 वर्ष 2020 वर्ष 2021
मेरठ 110 55 27
बागपत 60 25 0
गाजियाबाद 75 35 3
गौतमबुद्ध नगर 270 180 142
बुलंदशहर 155 110 50
हापुड़ 99 55 13