जिला पंचायत कार्यालय बागपत। संवाद
बागपत। जिला पंचायत में 30 करोड़ रुपये का बजट पड़ा हुआ है, मगर अधिकारियों की लेटलतीफी के कारण ही वह खर्च नहीं हो रहा है। क्योंकि विकास कार्यों के लिए ढाई महीने पहले 13 करोड़ रुपये के टेंडर छोड़े जा चुके हैं और अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण टेंडरों में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट जमा नहीं होना माना जा रहा है। अब जल्द ही कार्य शुरू कराने का दावा किया जा रहा है।
जिला पंचायत में हर साल करीब 15 करोड़ रुपये बजट मिलता है। यहां ममता किशोर को वर्ष 2021-22 में अध्यक्ष की कुर्सी मिली थी और तब जिला पंचायत का खजाना पूरी तरह से खाली थी। उसके बाद बजट मिलना शुरू हुआ और किसी भी वित्तीय वर्ष में वह पूरा खर्च नहीं हो सका। यहां कई साल तक जिला पंचायत अध्यक्ष व सदस्यों में खींचतान होती रही और अध्यक्ष पर विकास कार्य नहीं कराने के आरोप लगते रहे।
ऐसा भी रहा कि वर्ष 2024-25 में कार्य योजना को मंजूरी तक नहीं मिल सकी। इस तरह चार साल में पूरा बजट नहीं खर्च होने से अब जिला पंचायत के खाते में 30 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा हो गए हैं। इस बजट को खर्च करने के लिए करीब 13 करोड़ रुपये के टेंडर मार्च में जारी किए गए थे।
इनमें 114 कार्य शामिल थे जो नाला निर्माण, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग आदि है। मगर अब ढाई महीने बीतने के बाद भी जिन कार्यों के टेंडर छोड़े गए थे, उन पर कार्य शुरू नहीं हुए हैं। जबकि जिला पंचायत का केवल एक साल का कार्यकाल बाकी है और उसको 30 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च करने हैं।