बड़ौत (बागपत)। सिनौली में चल रहे उत्खनन के दौरान पुरातत्व विभाग को प्राचीन दीवार नजर आ रही है। इससे पहले भी एक दीवार यहां निकल चुकी है। संभावना है कि दोनों दीवार यहां मिले विशाल कब्रगाह की बाउंड्री हो सकती है। दीवारों को साफ करने की कवायद की जा रही है। इसके अलावा यहां एक कब्र और मिली है, जिसे चमकाने के लिए पुरातत्व विभाग की टीम जुटी है। एएसआई की महानिदेशक डॉ. ऊषा शर्मा और निदेशक संजय मंजुल ने निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जो भी पुरावशेष मिल रहे हैं, वह ऐतिहासिक है। इनके कालक्रम पर शोध के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय एवं भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला दिल्ली की संयुक्त टीम सिनौली में तीसरे चरण का उत्खनन कार्य कर रही है। रविवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की महानिदेशक डॉ उषा शर्मा यहां पहुंची। उन्होंने एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मंजुल से उत्खनन संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी ली। शोधार्थियों से अब तक की उपलब्धियों के विषय में पूछा। उत्खनन के दौरान यहां पर एक और दीवार दिख रही है। दीवार को हड़प्पा कालीन माना जा रहा है, हालांकि दीवार के कालक्रम की एएसआई ने पुष्टि नहीं की है। उत्खनन में जुटे यहां मिली एक कब्र को भी निखारने के काम में जुटे हैं। डॉ. ऊषा शर्मा ने कहा कि शोध पूरा होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
अब तक क्या खास
बड़ौत। तीसरे चरण के उत्खनन में महिला का कंकाल, आभूषण, शाही ताबूत, तलवार, प्राचीन दीवार मिल चुकी है। इसके अलावा यहां से धनुष मिलने की भी बात सामने आ रही है, लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। दूसरे चरण की खुदाई में यहां पर रथ निकला।
आम और खास हिस्सों में बंटा कब्रगाह
बड़ौत। तीन चरणों की खुदाई से स्पष्ट हो चुका है कि यहां पर विशाल कब्रगाह आम और खास हिस्सों में बंटा हुआ है। पहले चरण में आम लोगों के कंकाल मिले थे, जबकि दूसरे और तीसरे चरण में शाही लोगों के कंकाल, रथ, तलवार मिल चुके हैं।