बागपत। सिनौली के उत्खनन से इतिहास की कईं परतें खुलने की उम्मीद है। पुरातत्व विभाग ने स्वीकार किया है कि यहां पर पशुओं की हड्डियां बड़ी संख्या में मिली है। जिससे अनुमान लगाया जाता है कि पशुओं की बलि देने की परंपरा रही होगी, इसकी पुष्टि के लिए शोध किया जा रहा है। सूकर की हड्डियों के अवशेष भी मिले हैं। अन्य हड्डियां घोड़े या अन्य किन पशुओं की थी, पुरातत्व विभाग इसकी जांच में जुटा हुआ है।
सिनौली में दूसरे और तीसरे चरण के उत्खनन में मानव कंकाल, दीवार, तलवार और रथ के अलावा पशुओं की हड्डियां भी बड़ी संख्या में मिली है। पुरातत्व विभाग की महानिदेशक डॉ ऊषा शर्मा का कहना है कि इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पशुओं की बलि दिए जाने की परंपरा हो सकती है, लेकिन यह शोध का विषय है। डॉ संजय मंजुल ने बताया कि पशुओं की अलग-अलग आकार की हड्डियां मिली है, जिस पर शोध किया जा रहा है। दूसरे चरण की खुदाई में आठ कब्र, जबकि तीसरे चरण की खुदाई में अब तक दो कब्र मिल की है। मृदभांड मिले हैं, जिनके काल क्रम का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
किसने क्या कहा
एएसआई की महानिदेशक डॉ ऊषा शर्मा ने कहा कि यहां बेहद महत्वपूर्ण चीजें मिली हैं। शोध कार्य चल रहा है। अभी तक किसी ठोस नतीजे पर वह नहीं पहुंच सके हैं। इस पर पुरातत्व विभाग की टीम कार्य में जुटी हुई है।
एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डा संजय मंजुल का कहना है कि उत्खनन में पशुओं की हड्डी पहले भी मिली थी, सूकर के कुछ प्रमाण भी मिले हैं। इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत जां की जा रही है। अनुमान के तौर पर अभी कुछ भी कहना ठीक नहीं रहेगा।
कॉपर की टुकड़े मिले, रथ के पहियों और धनुष में प्रयोग की संभावना
बागपत। सिनौली में उत्खनन के दौरान कॉपर के टुकड़े मिले हैं। संभावना जताई जा रही है कि इन टुकड़ों का प्रयोग सजावट में किया जाता था। रथ के पहियों के अलावा धनुष की सजावट में इनका प्रयोग किया जाता रहा होगा। कॉपर के इन टुकड़ों की वजह से ही धनुष की संभावना जताई जा रही है। एएसआई की महानिदेशक डॉ ऊषा शर्मा का कहना है कि कॉपर के टुकड़े मिले हैं, जिनसे सिर्फ संभावना है। इसकी जांच की जा रही है, स्पष्ट तौर पर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
दूसरे चरण की खुदाई में निकले रथ के पहियों पर भी कॉपर की नक्काशी थी। पहिया की लकड़ी गल चुकी थी, लेकिन इनसे कॉपर के टुकड़े मिले थे। तीसरे चरण की खुदाई में धनुष के आकार में फैले कॉपर के टुकड़े मिले हैं। इन्हें बाहर निकाले जाने की प्रक्रिया चल रही है। संभावना है कि लकड़ी के धनुष पर कॉपर के टुकड़े लगाए गए होंगे। लकड़ी गल गई और कॉपर के टुकड़े बच गए। एएसआई की महानिदेशक डॉ ऊषा शर्मा कहती है कि इस पर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। पैटर्न मिला है, लेकिन हकीकत क्या है, यह शोध का विषय है।
कुरड़ी, बरनावा और सिनौली का भ्रमण करेगा शोध दल
छपरौली। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने बताया कि मंगलवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के 80 शोध छात्रों का दल बागपत आएगा। शहजाद राय संस्थान की ओर से इन्हें बरनावा, कुरड़ी और सिनौली में भ्रमण कराया जाएगा। बड़ौत में प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
कुरड़ी से जुड़ सकते हैं सिनौली के तार
बागपत। सिनौली में चल रहे उत्खनन के बाद अब कुरड़ी में भी ट्रेंच लगाया जा सकता है। संभावना यह है कि कुरड़ी गांव के टीले में भी इतिहास की परतें छिपी हो सकती है। पुरातत्व विभाग की टीम ने यहां निरीक्षण किया। असल में कुरड़ी और सिनौली में कुछ ही दूरी का फासला है। कुरड़ी में टीले पर मंदिर बना हुआ है। यहां जल्द ही उत्खनन का कार्य शुरू हो सकता है।