तीसरे स्थान पर सपा के राकेश यादव गुड्डू को 356 मत प्राप्त हुए। इसके अलावा अन्य प्रत्याशियों में अंबरीश कुमार विजयता को 16 और सिकंदर प्रसाद कुशवाहा को तीन मत प्राप्त हुए। अरुणकांत यादव की जमानत तो बच गई लेकिन शेष तीन प्रत्याशियों की जमानत भी नहीं बची।
हर टेबल पर विक्रांत को मिल सबसे अधिक वोट
मतगणना के लिए एफसीआई गोदाम में कुल 14 टेबल लगाई गई थी। जब परिणामों की घोषणा हुई तो उसमें पाया गया कि हर टेबल पर विक्रांत सिंह रिशू को हर प्रत्याशी से अधिक मत प्राप्त हुए थे। एमएलसी चुनाव के लिए आजमगढ़ मऊ के 34 बूथों पर कुल 5854 मतदाताओं ने मतदान में हिस्सा लिया था।
आजमगढ़ में दो दिग्गज नेताओं ने अपने-अपने पुत्रों को एमएलसी चुनाव में उतारा था। दोनों नेताओं ने पार्टी की धारा विपरीत जाकर अपने पुत्रों को जीत दिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। भाजपा ने जहां सपा के बाहुबली विधायक रमाकांत यादव के पुत्र अरुणकांत यादव को मैदान में उतारा था तो भाजपा के दिग्गज एमएलसी यशवंत सिंह ने निर्दल प्रत्याशी के रूप में अपने पुत्र विक्रांत सिंह रिशू को उम्मीदवार बनाया था। वहीं सपा ने अपने पूर्व एमएलसी राकेश यादव पर भरोसा जताते हुए प्रत्याशी बनाया था।
भाजपा प्रत्याशी के विरोध में प्रत्याशी उतारने के कारण भाजपा एमएलसी को पार्टी ने छह साल के लिए निष्कासित भी कर दिया। लेकिन वह इसकी परवाह किए बगैर अपने पुत्र को जीत दिलाने में सफल रहे। मंगलवार को हुई मतगणना में उनके पुत्र ने जीत हासिल की। चुनाव में हार मिलने के बाद भाजपा प्रत्याशी अरूणकांत यादव ने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में कोई कमी नहीं है। लेकिन जो भी कमी रही वह जिले स्तर पर रही। इस चुनाव में मैंने देखा कि जन प्रतिनिधि तक बिक गए।
मैंने यह चुनाव अकेले लड़ा है। चाहे हमारी पार्टी के नेता हों या दूसरी पार्टी के नेता हों सभी ने हमारा विरोध किया। वहीं जीत हासिल करने के बाद विक्रांत सिंह रिशू ने कहा कि हम जनता का आभार व्यक्त करते हैं। पूर्व मंत्री व एमएलसी यशवंत सिंह ने कहा कि मुझे पार्टी से निष्कासित करने की कोई सूचना नहीं है। सिर्फ मीडिया में ही यह बात आ रही है कि मुझे पार्टी से निष्कासित किया है। लेकिन मेरे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है।