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जिला अस्पताल में चल रहा कमीशनखोरी का बड़ा खेल

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सोशल मीडिया पर वायरल एक आडियो ने जिला अस्पताल प्रशासन की कलई को खोल दी है। इसमें अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लगे करोड़ों की लागत की कई मशीनों को कमीशनखोरी के खेल में चालू नही होने का आरोप लगाया गया है। यह आरोप कोई और नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में सरकारी अस्पतालों के मशीनों को ठीक कराने का ठेका लेने वाले साइरेक्स कंपनी के कर्मी ने लगाया है। आडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन एक दूसरे पर जिम्मेदारियां डाल खुद को बचाने में जुटा है।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ आडियो साइरेक्स कंपनी के कर्मी सर्वेश यादव का है। आडियो में वह बता रहा है कि जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए स्थापित करोड़ों की मशीनों को सिर्फ और सिर्फ कमीशनखोरी के चक्कर में अस्पताल के तथाकथित नोडल डॉ. चंद्रहास व ब्लड बैंक के प्रभारी सुबास पांडेय द्वारा नहीं चलने दिया जा रहा है। क्योंकि इन मशीनों से होने वाली जांच काफी महंगी होती है जो जिला अस्पताल में नि:शुल्क होती। जिला अस्पताल में मशीन होने के बाद भी सुविधा न मिलने पर मरीज मजबूरी में प्राइवेट सेंटरों पर यह जांच कराता है और उसका मोटा कमीशन नोडल व ब्लड बैंक प्रभारी द्वारा लिया जाता है।
इस बाबत जब डॉ. चंद्रहास से बात की गई तो उन्होंने गलत आरोप लगाए जाने की बात कही। वहीं सुबास पांडेय का कहना है कि वायरल आडियो में जिन मशीनों की बात हो रही है, उससे मेरा कोई लेना देना नहीं है। मेरा नाम तो इसलिए लिया जा रहा है कि मैंने कुछ साल पहले सर्वेश यादव की शिकायत किया था।
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वर्तमान में पैथलॉजी में लगी बायो केमेस्ट्री मशीन चल रही है, प्रतिदिन लगभग 100 जांच होती है। जहां तक वायरल आडियो की बात है तो एएमसी के भुगतान का बजट तो एसआईसी व उनके बाबुओं के पास ही आता होगा। एएमसी बिल का भुगतान नहीं होता है, तभी तो कई बार मुझे अपने पास से पैसा देकर पैथलॉजी की मशीनों को ठीक कराना पड़ा है।
डॉ. अजहर सिद्दिकी, पैथलॉजी इंचार्ज, जिला अस्पताल, आजमगढ़।
बायोकेमेस्ट्री मशीन को लेकर जो आडियो वायरल है, उसके बारे में मैं कुछ नहीं बता सकता। इसके बारे में डॉ. अजहर ही कुछ बता सकते हैं। जहां तक डॉ. चंद्रहास को नोडल बनाए जाने की बात है तो उन्हें मैने नहीं बल्कि मुझे एसआईसी बनने के पूर्व ही शासन स्तर से बनाया गया है। फिहलाल कोई मशीन खराब नहीं है।
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डॉ. एके सिंह, प्रभारी एसआईसी, जिला अस्पताल, आजमगढ़।
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