विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन के दूसरे दिन शुक्रवार को फूलपुर-पवई से सपा प्रत्याशी रमाकांत यादव और निजामाबाद सीट से भाजपा प्रत्याशी मनोज यादव ने नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके अलावा सर्व समाज जनता पार्टी के फूलपुर पवई से प्रत्याशी प्रदीप ने नामांकन दाखिल किया। वहीं कुल 44 लोगों ने 83 सेटों में नामांकन पत्र खरीदा।
नामांकन के पहले दिन बृहस्पतिवार को 67 नामांकन पत्रों की बिक्री हुई थी और एक प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल किया था। वहीं दूसरे दिन शुक्रवार को कुल 44 लोगों ने 83 सेटों में नामांकन पत्र खरीदा। शुक्रवार को फूलपुर पवई विधानसभा सभा सीट से सपा के प्रत्याशी रमाकांत यादव और इसी विधानसभा सीट से सर्व समाज जनता पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप ने नामांकन दाखिल किया। वहीं निजामाबाद विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी मनोज कुमार यादव ने नामांकन दाखिल किया।
वहीं 44 लोगों ने नामांकन पत्र खरीदे। अतरौलिया विधानसभा सीट से सपा के बरमन यादव ने चार, बसपा के सरोज कुमार ने दो और आप के रमेश ने दो, गोपालपुर से बसपा के रमेश चंद यादव ने दो और आप से सुनील कुमार यादव ने एक सेट, सगड़ी से कांग्रेस की राना खातून ने दो, बसपा से शंकर यादव ने तीन, आप से मुकेश राय ने तीन सेट में नामांकन पत्र खरीदा। मुबारकपुर विधानसभा सीट से भाजपा से श्यामसुंदर चौहान ने तीन, सपा से अखिलेश यादव ने तीन सेट, आजमगढ़ सीट से भाजपा के अखिलेश कुमार मिश्र ने तीन, सपा से दुर्गा प्रसाद यादव ने चार, आप के कृपाशंकर पाठक ने एक, फॅलपुर पवई से भाजपा के रणविजय चौहान ने दो, कांग्रेस के मो. शाहिद ने दो और आप के दुर्गविजय सिंह ने दो सेट में नामांकन पत्र खरीदा। दीदारगंज विधानसभा सीट से भाजपा के डॉ. कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा ने दो, कांग्रेस से अवधेश कुमार ने एक और राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल से हुजैफा आफिर ने दो, लालगंज सीट से आप के डॉ. हरिमन ने एक और कांग्रेस के अवधेश कुमार सिंह ने एक और मेंहनगर सीट से सपा के दीपचंद ने दो सेट में नामांकन पत्र खरीदा।
विलंब से पहुंचे भाजपा प्रत्याशी सत्येंद्र, नहीं कर सके नामांकन
आजमगढ़। भाजपा के गोपालपुर से प्रत्याशी सत्येंद्र राय को शुक्रवार को नामांकन करना था। तीन बजे के बाद वे भाजपा जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह के साथ नामांकन करने के लिए पहुंचे। समय बीतने के कारण मजिस्ट्रेट ने उन्हें बैरिकेडिंग के पास ही रोक दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष ने एडीएम प्रशासन को फोन किया तो वे अंदर तो गए लेकिन आरओ ने उनका नामांकन स्वीकार नहीं किया। इसके कारण उन्हें बिना नामांकन किए उन्हें लौटना पड़ा।