आजमगढ़। आजमगढ़ से लखनऊ जाने के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे सबसे छोटा रास्ता हो गया है। दोनों शहरों के बीच की दूरी 23 किलोमीटर कम हो गई है। इसके साथ ही छह लेन वाले इस मार्ग पर वाहनों रफ्तार भी तकरीबन दो गुना हो जाएगी। साढ़े तीन घंटे में सफर पूरा हो जाएगा। एक्सप्रेस-वे के किनारे बसे नौ जिलों में औद्योगिक गलियारा बनने से कारोबार को पंख तो पंख लगेंगे ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार है। इसका लोकार्पण 16 नवंबर को होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट है। लखनऊ के चांद सराय से गाजीपुर के हैदरिया के बीच के 340 किमी लंबी छह लेन वाली इस सड़क का 99 किमी हिस्सा आजमगढ़ में है। एक्सप्रेस-वे फूलपुर तहसील के खड़उरा गांव से मऊ के केरमा गांव के बीच है। इससे चार तहसीलों के करीब 112 गांवों जुड़े हुए हैं। आजमगढ़ से लखनऊ की दूरी मौजूदा समय में 268 किलोमीटर है। एक्सप्रेस-वे बनने से यह दूरी घटकर 245 किमी हो जाएगी। वर्तमान में फैजाबाद और सुल्तानपुर के रास्ते लखनऊ जाने में पांच से छह घंटे तक का समय लगता है, लेकिन पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से यह दूरी तीन से साढ़े तीन घंटे में पूरी हो जाएगी। लखनऊ ही नहीं बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ व गाजीपुर जाना-आना आसान हो जाएगा। एक्सप्रेस-वे के पास औद्योगिक गलियारे का विकास किया जाना है। इससे स्थानीय स्तर पर औद्योगिक इकाइयां लगेंगी, जिससे रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। मुबारकपुर की साड़ियों को इससे पंख लग जाएंगे। सफर सुगम होने पर दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां तेज होंगी। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर जिले में 18 फ्लाईओवर, सात आरओबी, सात दीर्घ सेतु, 118 लघु सेतु, 13 इंटरचेंज, 271 अंडरपास तथा 503 पुलिया हैं।
मंदुरी एयरपोर्ट से उड़ान कवायद तेज
आजमगढ़। एनएच-233 का सेहदा में क्रास करने वाले पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के समीप ही मंदुरी एयपोर्ट बन रहा है। यहां से उड़ान शुरू हो जाने के बाद आजमगढ़ ही नहीं पूर्वांचल के कई जिलों के लिए यह फायदेमंद साबित होगी। औद्योगिक गतिविधियों के लिए एक्सप्रेस-वे व मंदुरी से उड़ान से काफी फायदा होगा।
13 नवंबर को राज्य विश्वविद्यालय का होगा शिलान्यास
आजमगढ़। केंद्रीय गृह तथा सहकारिता मंत्री अमित शाह का 13 नवंबर को आजमगढ़ का दौरा है। अमित शाह आजमगढ़ के आजमबांध में राज्य विश्वविद्यालय की आधारशिला रखेंगे। साथ ही अकबेलपुर में जनसभा करेंगे। विश्वविद्यालय का निर्माण 550 करोड़ रुपये की लागत से किया जाना है। प्रथम चरण में 108 करोड़ रुपये की लागत विश्व विद्यालय परिसर, प्रशासनिक और आवासीय भवनों का निर्माण किया जाएगा। यह काम पीडब्ल्यूडी को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। राज्य विश्वविद्यालय 52 एकड़ में बनेगा।