इसके बाद भी जिले का प्रशासनिक व पुलिस महकमा जहरीली शराब की घटना में कार्रवाई के बजाए इसे छुपाने में ही जुटा नजर आया। एसपी के साथ ही डीएम भी जिले में शराब के सेवन से एक की मौत को मानने को तैयार नहीं है। इतना ही नहीं लेखपाल को गांव में भेज कर मुआवजा देने के नाम पर कागज पर हस्ताक्षर करवाए जा रहे है और उसमें रिपोर्ट सर्दी-खांसी, बुखार से मौत की लगाई जा रही है।
अमर उजाला ने गुरुवार के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। वहीं ग्रामीण बुधवार की रात से गुरुवार की सुबह तक छापेमारी कर भारी मात्रा में जहरीली शराब की खेप बरामद की है। यह काम एसपी को करना चाहिए था लेकिन वे तो सिर्फ घटनाक्रम को छिपाने में ही जुटे रहे।