बिना किताब के पढ़ाई करते बच्चे।
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परिषदीय विद्यालयों में पहला सत्र बीतने को है। लेकिन बच्चों को नि:शुल्क बांटी जाने वाली किताब ही नदारद है। ऐसे में सरकार की कांवेंट स्कूलों को टक्कर दिए जाने वाली मंशा कैसे पूरी हो सकेगी। देखा जाए तो महकमा सिर्फ फल, दूध और एमडीएम तक सिमट कर ही रह गया है।
कांवेंट विद्यालयों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए सरकार परिषदीय विद्यालयों की स्थिति में भी सुधार करने की जुगत में लगी हुई है। सरकार परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए पुस्तक, बैग, खाना, फल, दूध आदि सभी उपलब्ध करा रही है। लेकिन इसके बाद भी परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ने का नाम नहीं ले रही है। इसके लिए सरकार भी कम दोषी नहीं है। क्योंकि सरकार ने परिषदीय विद्यालयों का नया शिक्षण सत्र अप्रैल माह से शुरू तो कर दिया लेकिन नए सत्र के पहले सेमेस्टर की परीक्षा हो रही है लेकिन अभी तक विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंच सकी है।
जनपद में 2267 प्राथमिक और 983 जूनियर विद्यालय हैं। इनके अलावा ऐडेड प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 83 और जूनियर के कुल 97 विद्यालय है। इनके लिए कुल 457334 पुस्तकों की डिमांड है। लेकिन अभी तक मात्र कक्षा एक पुस्तकें ही आई हैं। जबकि नए सत्र में चार महीने का समय बीत गया और वर्तमान में सत्र परीक्षा चल रही है।