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गोल्डेन समय में बचायी जा सकती है नवजात की जान

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जहानागंज। राजकीय मेडिकल कालेज व सुपर फैसिलिटी अस्पताल के बाल रोग विभाग में शुक्रवार को नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को रोकने हेतु एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए डा. दीपक पांडेय ने बताया कि नवजात शिशु के जन्म से लेकर एक मिनट तक के समय को गोल्डेन समय कहा जाता है। इस समय में यदि बच्चा सांस नहीं ले पा रहा है तो तुरंत उसे प्रशिक्षित डाक्टर की तत्काल आवश्यकता होती है। बच्चा पैदा होते ही जटिलताएं सामने आती है, यदि उनका निराकरण नहीं किया गया तो मृत्यु दर को रोकना मुश्किल होगा। इसी उद्देश्य हेतु कार्यशाला आयोजित की गयी है।
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रीजनल कोऑर्डिनेटर डा बीएन गुप्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मृत्यु दर 35 से 36 प्रतिशत है जबकि आजमगढ़ में मृत्यु दर 63 प्रतिशत है वहीं शहर की मृत्यु 40 प्रतिशत ही है। शासन के निर्देश पर शुक्रवार की सुबह 8 बजे से सायं पांच बजे तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम में रीजनल कोऑर्डिनेटर के रूप में वाराणसी के डा बीएन गुप्ता, हेरिटेज हास्पिटल वाराणसी के डा रितेश अग्रवाल, स्थानीय राजकीय मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग विशेषज्ञ डा दीपक पांडेय व डा अंनता जायसवाल ने बाल रोग विभाग, एनेस्थीसिया, गायनिक तथा सीमित मात्रा में मेडिसिन व सर्जरी के जूनियर चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया। सभी प्रशिक्षकों ने अलग-अलग चार टीमों के माध्यम से कुल 32 जूनियर डाक्टरों को प्रशिक्षित किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ प्रधानाचार्य आर पी शर्मा ने किया। कार्यशाला के अंत में सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित किया गया। इस दौरान बाल रोग विभाग के डा. नैयर आजम, डा. अबूजैद के साथ डा. अमित निगम, डा. अमजद खान, डा. उमेश चंद यादव, डा. आनंद कुमार पटेल आदि मौजूद रहे।
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