वर्ष 2008 में लगभग 76 लाख रुपये की लागत से जिम्नेजियम हॉल का निर्माण कराया गया। कई सालों बाद इसका लोकार्पण हुआ लेकिन इसमें कुश्ती के लिए बनाई गई लकड़ी की फ्लोरिंग टूट गई थी। जिस पर खेल तो दूर पैदल चलना भी दूभर हो गया था।
जिसे पूर्व आरएसओ मुद्रिका पाठक ने अपने प्रयास से लकड़ी की फ्लोरिंग को हटाकर फर्श बनवा दिया और इसी में जिम करने की मशीनें भी लगवा दी। लगभग 50 लाख रुपये की लागत से बना बास्केटबाल का सिंथेटिक कोर्ट जगह-जगह से सड़ चुका है। स्टेडियम से बाहर खिलाड़ियों के रहने के लिए छात्रावास बनाया गया।
उप क्रीड़ाधिकारी राज नरायन प्रसाद ने कहा कि एक समस्या कोच की है। कोरोना के कारण संविदा प्रशिक्षकों की तैनाती नहीं हुई। हाल में कुछ कोच की तैनाती हुई लेकिन दो को छोड़कर किसी ने ज्वाइन नहीं किया। दूसरी समस्या बच्चों के घर से आने की है। जिसके कारण वह समय पर कोचिंग में नहीं पहुंच पाते हैं। इसके लिए अभिभावक जिम्मेदार हैं। स्टेडियम पांच बजे खुल जाता है लेकिन बच्चे सात बजे तक आते हैं।