सत्यदेव बरनवाल अगर खेलों का विकास करना है, अपने बच्चों का भविष्य बनाना है और अपनी आने वाली नस्ल को बचाना है तो उसके लिए हमें (माता पिता ) अपनी सोच पहले बदलनी होगी। इंजीनियर बनाने के लिए सरकार क्या मदद देती है, डॉक्टर बनाने के लिए सरकार क्या देती है? लेकिन खेल में कुछ करना है तो सरकार से उम्मीद लगाते हैं।
हम खुद आगे नहीं आना चाहते। जब तक हम आगे नहीं आएंगे तब तक कुछ नहीं हो सकता है। सत्यदेव के कोच विवेक चिकारा ने कहा कि सत्यदेव बहुत ही होनहार खिलाड़ी है। वह ऐसे अकेले खिलाड़ी हैं जिन्होंने पैरा एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता है। भारतीय ट्रायल में वर्ल्ड रिकार्ड तोड़ा है।
आजमगढ़ का एकमात्र सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम अपनी एक अलग पहचान रखता है। इस स्टेडियम ने कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को तराशा है। लेकिन कोरोना के कारण विगत दो सालों से कोच की तैनाती न होने से खिलाड़ी का भविष्य अधर में है। क्योंकि खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने वाला कोई नहीं है।
जनपद से निकलकर देश और विदेश में अपना और जनपद का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की पूरी फौज है। सुविधाओं के अभाव में भी यह खिलाड़ी सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम में निखर कर सबको अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हैं। लेकिन आज अधिकारियों की उपेक्षा के कारण यह स्टेडियम उजड़ सा गया है। स्टेडियम की आउटफील्ड हल्की बारिश में ही तालाब में तब्दील हो जाती है।जिसके कारण फुटबाल, हॉकी, हैंडबाल, क्रिकेट आदि खेल नहीं हो पाते हैं।