पुलिस और अधिकारियों से उलझे धर्मेंद्र यादव
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तीसरे स्थान पर रहे बसपा के शाह आलम गुड्डू जमाली को दो लाख 66 हजार 210 मत प्राप्त हुए। इसके अलावा अमरावती को 1743 मत, जयनाथ चौहान को 1952 मत, धीरज श्रीवास्तव को 2935 मत, रविंद्र नाथ शर्मा को 2597 मत, सरवर अली को 1519 मत, अंबरीष कुमार विजयता को 1515 मत, पंकज कुमार यादव को 1249 मत, रमाकांत यादव को 2535 मत, राजीव तलवार को 2549 मत और धीरेंद्र कुमार निषाद को 2377 मत प्राप्त हुए। इसके अलावा नोटा को 5369 मत प्राप्त हुए।
सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव ने हार के लिए प्रशासन, बसपा और भाजपा के गठजोड़ को जिम्मेदार ठहराया। बसपा प्रत्याशी शाह आलम गुड्डू जमाली ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि 2024 में वह फिर मैदान में आएंगे। भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ ने कहा कि यह आजमगढ़ की जनता की जीत है।
लोककसभा सीट आजमगढ़ पर इस बार तीसरा उपचुनाव हुआ है। पूर्व के दो उपचुनावों का मिथक भी इस बार टूटा और इस बार यहां की जनता विपक्ष के बजाए सत्तापक्ष के साथ नजर आई। जबकि पूर्व के उपचुनाव में जनता ने केंद्रीय सत्ता से इतर जनादेश दिया था।
जनपद में पहला उपचुनाव 1978 में हुआ था। 1977 के आम चुनाव में आजमगढ़ सीट से जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में रामनरेश यादव ने कांग्रेस के चंद्रजीत यादव को पराजित कर इस सीट पर जीत दर्ज की थी। प्रदेश में भी जनता पार्टी की सरकार बनी थी। रामनरेश यादव के इस्तीफे के बाद 1978 में उपचुनाव हुआ। इसमें कांग्रेस पार्टी ने मोहसिना किदवई को मैदान में उतारा। केंद्र की सत्ता पर काबिज जनता पार्टी ने रामबचन यादव पर दांव खेला। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी स्वयं मोहसिना किदवाई की जीत के लिए मैदान में उतर पड़ी। इसका परिणाम रहा कि पहले उपचुनाव में मोहसिना किदवाई ने जीत दर्ज की।
उन्होंने सत्ता में रहे जनता पार्टी के प्रत्याशी रामबचन यादव को 35,385 मतों के अंतर से हराया था। दूसरा उपचुनाव 2008 में हुआ। इस दौरान केंद्रीय सत्ता में कांग्रेस थी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। यह चुनाव 2004 के आम चुनाव में सपा के टिकट पर जीते रमाकांत यादव की सदस्यता समाप्त हो जाने के कारण हुआ था।
सपा से नजदीकी के चलते बसपा ने दल बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करवा दी थी। 2008 के उपचुनाव में सपा ने बलराम यादव को मैदान में उतारा। बसपा ने अकबर अहमद डंपी पर दांव खेला। प्रदेश की सत्ता में रही कांग्रेस ने एहसान खान पर दांव लगाया। इधर, सपा से टिकट न मिलने पर रमाकांत यादव ने भाजपा का दामन थाम लिया और कमल निशान पर चुनाव लड़ा।
इस चुनाव में भी केंद्र की सत्ता के इतर जनादेश आया और बसपा के अकबर अहमद डंपी चुनाव जीत गए। कांग्रेस के एहसान खान की जमानत भी नहीं बची। बसपा के डंपी ने 52368 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। भाजपा दूसरे तो सपा के बलराम यादव तीसरे स्थान पर रहे। 2019 के आम चुनाव में रिकार्ड वोट से सांसद बने सपा मुखिया अखिलेश यादव के इस्तीफे के चलते इस बार उपचुनाव हुआ।
वर्तमान में केंद्र में भाजपा की सरकार है और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं। सपा मुखिया ने अपनी छोड़ी सीट पर चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारा। भाजपा ने 2019 में प्रत्याशी रहे दिनेश लाल यादव निरहुआ पर ही दांव खेला तो वहीं बसपा ने पूर्व विधायक शाह आलम जमाली को मैदान में उतार दिया। इस चुनाव में पूर्व के दो चुनाव के मिथक टूट गए और आजमगढ़ की जनता ने विपक्ष के बजाए सत्तापक्ष के साथ जाने की राह चुनी। इसका परिणाम रहा कि केंद्र में सत्ताधारी भाजपा के प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ ने जीत दर्ज की।