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महिलाओं ने श्रद्धा से रखा ललही छठ

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ललही छठ पर अंबारी में पूजन करती महिलाएं। - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। जिले में शनिवार को पुत्रों की दीर्घायु की कामना के साथ मनाया जाने वाला ललही छठ परंपरागत ढंग से मनाया गया। महिलाओं ने दही, महुआ व चावल चढ़ाकर ललही देवी का पूजन-अर्चन किया और कथा सुनीं। माताओं ने व्रत के साथ पुत्रों की दीर्घायु की कामना की।
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बताते चलें कि सनातन धर्म में भाद्र माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल षष्ठी या ललही छठ मनाने की परंपरा है। इस दौरान महिलाएं हलषष्ठी का व्रत संतान की लंबी आयु की प्राप्ति के लिए रखती हैं। इस दिन व्रत के दौरान कोई अन्न नहीं खाया जाता है। महुआ की दातुन कर हलषष्ठी व्रत में हल से जुती हुई अनाज और सब्जियों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इस व्रत में केवल वही चीजें खाई जाती हैं जो तालाब में पैदा होती हैं। जैसे तिन्नी का चावल, करमुआ का साग, पसही का चावल आदि। इस व्रत में दूध और उससे बने उत्पाद जैसे दही, गोबर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। हलषष्ठी व्रत में भैंस का दूध, दही और घी के प्रयोग की परंपरा है। इसी क्रम में शनिवार को नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में थाल में दही, महुआ, चावल सहित अन्य पूजन सामग्री सजाकर महिलाएं तालाब व सरोवरों के किनारे स्थित ललही देवी के स्थान पर पहुंची। इस दौरान विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। साथ ही सामूहिक रूप से कथा भी सुनीं। पौराणिक मान्यता है कि ललही देवी की पूजा करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति के साथ उनकी उम्र लंबी होती है। ग्रामीण ही नहीं नगर क्षेत्र में भी तमाम महिलाओं ने इस व्रत को श्रद्धा के साथ रखा। हाथों में पूजा की थाल सजाए महिलाएं घरों के छतों पर ही इस बार पुजा अर्चना की। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में माताओं ने बेटे की लंबी उम्र और मंगलकामना के लिए ललही छठ का व्रत रखा। पूजन के बाद बेटे के लिए आशीष मांगा। सुबह से ही गांवों में उत्साह देखा गया। अंबारी, माहुल, फूलवरिया, गनवारा, सुम्माडीह, गोदना, मैगना, बिलारमऊ, पुष्पनगर, दीदारगंज सहित पूरे तहसील क्षेत्र में ललही छठ का पर्व मनाया गया।
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