आजमगढ़। उपेक्षा के चलते धरोहर में शुमार शाही पुल बदहाल हो गया है। कभी शहर की पहचान में शुमार इस पुल पर इन दिनों लोग कूड़ा फेंक रहे हैं औक एक तरफ की सड़क धंस रही है। पुल का निर्माण वर्ष 1530 में शेरशाह सूरी ने करवाया था।
शेरशाह सूरी नौकरी के लिए जौनपुर के गवर्नर जुनैद के पास पहुंचे और बाबर की सेना में भर्ती हो गए थे। उन्होंने अफगानों के विरुद्ध बाबर का साथ दिया। इससे प्रसन्न होकर बाबर ने वर्ष 1528 में सासाराम की जागीर पर कब्जा कर उसे शेर खां को दे दिया। बाबर की सेना में रहते हुए उनका अक्सर आजमगढ़ के रास्ते आना-जाना होता था। आवागमन की दिक्कत को देखते हुए सन 1530 के आस-पास शेरशाह सूरी ने आजमगढ़ शहर में तमसा नदी पर शाही पुल का निर्माण कराया था। यह पुल आज भी बरकरार है। वाहनों और राहगीरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शाही पुल के बगल में नया पुल बनाया गया। अब उसी से आवागमन होता है और शाही पुल को बंद कर दिया गया है। ऐसे में ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह से उपेक्षित है। पुल के एक हिस्से की सड़क धंस रही है। लोग इस पर कूड़ा ेंक देते हैं। पुल से महज 300 मीटर की दूरी पर डीएम, एसपी से लगायत तमाम अधिकारियों के आवास हैं लेकिन किसी को इसे संरक्षित करने की फिक्र नहीं है।
नया पुल बनने के बाद पीडब्ल्यूडी को पुल हैंडओवर कर दिया गया है। पुराना पुल भी पीडब्ल्यूडी के ही अधीन आता है। यदि शाही पुल जर्जर अवस्था में है तो उसकी मरम्मत कराने की जरूरत है। उपर से जैस निर्देश होगा वैसा किया जाएगा।
आरएस राय, परियोजना प्रबंधक सेतु निगम।