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घर-घर विराजे गजानन, मंदिरों में गूंजा-गणपति बप्पा मोरया

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बड़ा गणेश मंदिर पर दर्शन-पूजन को भक्तों की लगी कतार। - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। गणेश चतुर्थी का उत्साह शुक्रवार की सुबह से ही छाया रहा। लोग अपने परिवार के साथ गणेशजी लेकर अपने घर पहुंचे। जहां विधिविधान से पूजा-अर्चना करके गणेशजी की स्थापना की गई। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के गणेश मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही, मंदिर गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गुंजायमान हो गए।
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तीज का पारण खत्म होने के साथ ही गणेश पूजा शुरू हो गई है। हर तरफ गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंज रहे थे। सुबह से ही बाजारों में गणेश प्रतिमाएं लेने के लिए लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। इसके बाद परिवार सहित विधिवत पूजा अर्चना कर आरती की गई और गणेश जी को भोग लगाया गया। शहर में कई जगह गणेश प्रतिमा स्थापित की गई हैं। हालांकि इस बार प्रतिमाओं का आकार कुछ कम रखा गया है। लोगों ने यह भी ध्यान रखा है कि प्रतिमा तीन फुट से अधिक बड़ी न हो। शहर के आसिफगंज मोहल्ला में मराठी समाज द्वारा गणेश की मूर्ति स्थापित की गई थी। जिसमें विजय, महेश, यूराज, बालकीशन, रोहित, संभाजी, सदाशिवजी व प्रकाश मानिक शामिल रहे। वहीं सरायमीर में भी गणेश जी की प्रतिमा स्थापित रही। शहर से लेकर गांव तक के मंदिरों में सुबह से ही भीड़ देखने को मिली। श्रद्घालुओं का मानना है कि विघ्नहर्ता गणेश का दर्शन मात्र से हर बाधा दूर हो जाती है। वहीं, अहरौला के आलमपुर गांव में 20 वर्षों से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपरा के अनुसार शुक्रवार को गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालुओं ने गणेश जी की स्थापना के लिए प्रतिमा के साथ शोभायात्रा निकाली। इस दौरान पूरा क्षेत्र गणपति बप्पा मोरया के जयकारे से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। हालांकि पिछली वर्ष कोरोना के कारण यह परंपरा टूट गई थी। शुक्रवार को गणेश चतुर्थी पर पुन: एक सप्ताह तक चलने वाला गणेशोत्सव में पूरा गांव गणपति बप्पा मोरिया में रम जाता है। रात में जागरण भी होता है। आलमपुर गांव मे गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की प्रतिमा को गांव के पूर्व प्रधान श्रीराम चौहान के नेतृत्व मे स्थापित किया जाता है। गणेश प्रतिमा के साथ लगभग तीन किलोमीटर लंबी शोभायात्रा लोग जयकारे व भक्ति गीत गाते हुए निकालने के बाद गांव के लोग नाचते और गाते हुए भगवान गणेश की प्रतिमा को गांव में ले जाते हैं और देर शाम विधि विधान से उनकी स्थापना की जाती है। एक सप्ताह तक यह पूरा गांव गणेशोत्सव मे डूब जाता है। गणेश स्थापना की पूरी प्रक्रिया आलमपुर गांव के पूर्व प्रधान रहे श्रीराम चौहान और उनके मुंबई में निवास करने वाले तीन अन्य भाई भाग लेने के लिए मुंबई से आलमपुर गांव लौटते हैं। एक सप्ताह तक पूरा गांव गणेश की साधन में लीन रहता है। शोभा यात्रा में श्रीराम चौहान, राम आसरे चौहान, लक्ष्मी चौहान, बृजभान चौहान, राम अजोर चौहान, दयाराम चौहान व पृथ्वीराज चौहान भारी संख्या में गांव की महिलाएं एवं पुरुष शामिल रहे।

अहरौला के आलमपुर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर निकाली गई शोभा यात्रा।- फोटो : AZAMGARH

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