जनपदवासियों की मांग पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने जिस चीनी मिल को सठियांव में फिर से शुरू कराया, वह उद्घाटन के एक माह तक भी चलने में अक्षम है। इसका कारण है गन्ने की आपूर्ति न होना। कुल मिलाकर प्रदेश सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना किसी भी क्षण नो केन के चक्कर में बंद हो सकती है। उद्घाटन के 11वें दिन शनिवार को गन्ने के अभाव में मात्र 10 हजार कुंतल गन्ने की आपूर्ति हुई। जबकि मिल की प्रतिदिन पेराई क्षमता 35 हजार कुंतल है।
चीनी मिल की स्थापना के साथ ही गन्ना समिति का गठन करके विभाग ने जिले के बड़े कास्तकारों को सब्सिडी देकर गन्ना की बुआई कराई थी ताकि मिल शुरू होने पर गन्ने की कमी न हो। अधिकारी भी अाश्वस्थ थे कि मिल में पेराई के लिए पर्याप्त गन्ना मिलेगा लेकिन किसानों ने पेराई शुरू होते ही अपने गन्ने को दूसरे मिलों में 250 रुपया प्रति कुंतल के भाव से बेच दिए। मिल नो केन के अभाव में बंद हो सकती है।
शनिवार को मिल में मात्र 10 हजार कुंतल गन्ना किसानों ने पहुंचाया, जो कि मिल की पेराई क्षमता को देखते हुए एक घंटे में ही समाप्त हो जाएगा। इसके बाद क्या होगा, इसकी चिंता मिल प्रबंधन को सताने लगी है। चीनी मिल अब तक 75 हजार कुंतल गन्ने की पेराई कर चुकी है। अगर यही हाल रहा तो मिल को बंद करना पड़ सकता है।
नोटिस जारी कर और मुनादी कर किसानों को अवगत करा दिया गया है कि गन्ने के बीज के अतिरिक्त उनके पास जो भी गन्ना है, उसे मिल को आपूर्ति करें।
- एएस पोरस, जीएम