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जनपद में सरोवर बनने में हो रही देरी, %अमृत% सहेजना मुश्किल

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आजमगढ़। शासन द्वारा जल संरक्षण व प्राकृतिक छटा निखारने के उद्देश्य से ग्राम पंचायतों में ‘अमृत सरोवर योजना’ के तहत जनपद में तालाबों व पोखरों की खोदाई कर उसे अमृत सरोवर के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। ग्राम पंचायतों में बनाए जा रहे अमृत सरोवर के निर्माण की गति काफी धीमी है। ऐसे में बारिश के पूर्व इनका निर्माण पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में जब बारिश के जल रूपी ‘अमृत’ को सरोवर नहीं सहेज पाएंगे तो अमृत सरोवर औचित्यहीन साबित होंगे। शासन ने मई माह में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जिले के ताल व पोखरों को सजाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसके तहत जिले के 22 विकास खंडों के गांवों में खोदाई शुरू हो गई। जल व पर्यावरण संरक्षण कि दिशा में चल रहे इस विशेष अभियान के अंतर्गत तालाब व पोखरों को 15 अगस्त तक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने के निर्देश दिए है ताकि अमृत सरोवरों पर स्वतंत्रता दिवस के दिन ध्वजारोहण किया जा सके। शासन से जारी सूची के अनुसार जिले में 75 बड़े सहित कुल 150 पोखरों व तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जाने की तैयारी चल तो रही लेकिन जमीन पर कुछ काम नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। कहीं साफ-सफाई तो कहीं मिट्टी खोदाई का कार्य चल रहा है। जबकि पिछले कुछ वर्षों के अनुभवों के आधार पर लोगों में इस बात की चर्चा है कि अक्सर जून के तीसरे सप्ताह में मानसून आने की प्रबल संभावना रहती है ऐसे में यदि खोदाई पूर्ण होने के पूर्व यदि बारिश हो गई तो फिर अमृत सरोवर योजना का कार्य न सिर्फ अधर में लटक जायेगा बल्कि मिट्टी भी पानी के साथ बहकर पुन: उसी गड्ढे में चली जाएगी जहां से खोदकर निकाली गई है।
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प्रत्येक सरोवर पर 15 से 25 लाख रुपये हो रहे खर्च
प्रभारी डीसी मनरेगा मिथिलेश तिवारी ने बताया कि एक सरोवर पर 15 से 25 लाख रुपये खर्च होगा। खोदाई का कार्य मनरेगा मद से तो राज्य वित्त से भी धनराशि खर्च की जाएगी। ग्रामसभा इन्हें सुंदर बनाने के लिए ग्राम निधि भी खर्च कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कार्यों में तेजी लाने के लिए निर्देश दिया गया है। उम्मीद है कि समय से पूरा कर लिया जाएगा।
इस तरह का होगा स्वरूप
तालाब की खोदाई कर गहरा किया जाएगा। सरोवर में पानी जाने एवं निकालने के लिए व्यवस्थाएं होंगी। तालाब में उतरने के लिए रैंप (सीढ़ियां) बनेंगे तो चारों तरफ ट्रैक (घूमने को पाथ-वे) बनाया जाएगा। बैठने के लिए बेंच लगेगी और चबूतरों का निर्माण कराया जाएगा। यहां पर एक सामुदायिक शौचालय और भवन भी बनाए जाएंगे। इन स्थलों का उपयोग सार्वजनिक कार्यों के लिए भी हो सकेगा।
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मिट्टी खोदाई तो दूर अभी साफ-सफाई भी नहीं
रानी की सराय। शासन की ओर से रानी की सराय ब्लाक के नेवरही गांव के पोखरे का अमृत सरोवर योजना के तहत चयन किया गया है। इसके तहत सरोवर को अमृत सरोवर के रूप में विकसित करना है। इसे 15 अगस्त तक पूर्ण करने की योजना है। ताकि यहां झंडा रोहण किया जा सके। बावजूद यहां ग्राम प्रधान व जिम्मेदार अधिकारी इस तरफ तनिक भी ध्यान नहीं दे रहे है। उधर बारिश का मौसम भी नजदीक आ गया है। ऐसे में बारिश हुई तो यहां सरोवर विकसित हो पाना मुश्किल हो जाएगा।
अभी हो रही पोखरे की साफ-सफाई
रानी की सराय। शासन ने रानी की सराय ब्लाक में अमृत सरोवर योजना के तहत रुदरी गांव के तालाब को चयनित कर खुदाई व सुंदरीकरण का लक्ष्य दिया है। शासन के 100 दिन के एजेंडे में यह शामिल है लेकिन करीब एक माह बीत गया लेकिन अभी इसपर कार्य ठीक से नहीं हो सका। मनरेगा के तहत ग्रामीण यहां काम तो कर रहे लेकिन अभी तक सिर्फ साफ-सफाई की जा रही है। उधर, बारिश होने की भी संभावनाएं बढ़ गई है। ऐसे में समय से अमृत सरोवर योजना के जरिए तालाब की खुदाई व सुंदरीकरण कैसे हो पाएगा, यह यक्ष प्रश्न बना है।
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