उच्च न्यायालय के आदेश पर जिलाधिकारी ने शनिवार को बैजनाथ बनाम स्वामीनाथ मौजा रणमों, परगना देवगांव, तहसील लालगंज के वाद में जमीन को ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्होंने उक्त भूमि पर फर्जी इंद्राज के सहारे कब्जा जमाने वाले कब्जेदारों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है।
जिलाधिकारी ने बताया कि ग्राम रणमों तहसील लालगंज के गाटा संख्या 122 पुराना, जिसका नया गाटा संख्या 36 है, जिसका रकबा 8.230 कड़ी बंदोबस्त के ऊसर खाते में दर्ज है। इस रकबे को मशकूक करके 6.730 किया गया है। लेकिन ऊसर के खाते के कुल गाटों का पूर्ण रकबा 60.103 अब भी यथावत है, उसमें मशकूकी नहीं हो पाई है। खाता संख्या 77 में नरेश के नाम से अभिलेखों में केवल एक गाटा 100.346 क्षेत्रफल .384 लगान 2.25 दर्ज था। जिसमें फर्जी ढंग से गाटा संख्या 36 क्षेत्रफल 1.500 बढ़ाया गया है, पर खाते का लगान 2.25 अब भी यथावत है। यदि इस खाते में रकबा 1.500 पहले से दर्ज होता तो इसका लगान भी शामिल करते हुए 2.25 से ज्यादा होता। प्रविष्टि की संदिग्धता इससे भी स्पष्ट है कि जल्दी-जल्दी में पहले यही गाटा और रकबा खाता 78 पलकधारी आदि के खाते में लिखकर काटा गया। फर्जी प्रविष्टि से संबंधित व्यक्ति नरेश के वारिसान रामनाथ आदि का खाता 61 में भी गाटा संख्या 36 मि./ क्षेत्रफल .607 वर्तमान में फर्जी ढ़ंग से अंकित है। यह इंद्राज स्पष्ट रूप से फर्जी दर्ज है, जो सर्वथा अनुचित और अवैधानिक है। इसी संदर्भ में पारित चकबंदी अधिकारी के आदेश नौ जुलाई 1970 द्वारा गाटा संख्या122 क्षेत्रफल 1.500 ग्राम समा से खारिज करके नरेश को सीरदार बनाया गया है। यह आदेश विधि विरूद्ध है क्योंकि चकबंदी अधिकारी को किसी भूमि में किसी व्यक्ति को सीरदारी देने का विधिक अधिकार नहीं है। ऊसर ग्राम सभा की भूमि को क्षति पहुंचाकर नरेश और उनके वारिसान द्वारा अनुचित लाभ लिया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त फर्जी प्रविष्टि को निरस्त कर उसे पूर्ववत ग्राम सभा के खाते में अंकित किया जाना उचित होगा। उन्होंने बताया कि ग्राम रणमों के गाटा संख्या 36 के विपक्षीगण रामनाथ, स्वामीनाथ, राम नरायन और श्यामनरायन पुत्र नरेश का नाम निरस्त करते हुए उसे पूर्ववत ग्रामसभा के ऊसर के खाते में अंकित किए जाने का आदेश दिया जाता है। जिलाधिकारी ने मुख्य राजस्व अधिकारी को निर्देशित किया कि इस कार्य में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थियों के विरूद्ध लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराएं। साथ ही एक सप्ताह में भूमि को पूर्व रूप में लाते हुए एक सप्ताह के अंदर न्यायालय में आख्या प्रस्तुत करें।