सात कर्मचारियों को मिले दो-दो सौ डॉलर
धर्मेंद्र ने बताया कि चलते वक्त कंपनी ने स्टील प्लांट के सात कर्मचारियों को दो-दो सौ डॉलर दिए थे लेकिन बाद में जाने वाले वाले कर्मचारियों को खाली ही हाथ घर लौटना पड़ा। जब तक हम कंपनी में थे किसी प्रकार की दिक्कत नहीं थी लेकिन एयरपोर्ट का नजारा कुछ और ही था। वहां भगदड़ का माहौल था। हर कोई अफगानिस्तान छोड़कर जाना चाहता था। विमान में 161 यात्री थे, जिसमे 90 यात्री भारत के थे और शेष यात्रियों के बारे कोई जानकारी नहीं है।
दो साल में मात्र दो दिन निकला प्लांट से बाहर
धर्मेंद्र चौहान ने बताया कि वहां प्लांट में ही भोजन-पानी की व्यवस्था है। दो साल में मधुमेह का इलाज कराने के लिए दो दिन तक वह स्टील प्लांट परिसर से बाहर रहा। प्लांट का मालिक बहुत अच्छा था। हालत कुछ ऐसे बन गए कि वापस घर आना पड़ा अन्यथा कोई दिक्कत नहीं थी। इस दौरान हम लोग भारतीय दूतावास से बराबर संपर्क में थे। घर वालों से भी लगातार बातचीत होती रही।