फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ayodhya News: जय रघुनंदन बोल अभय का सपा से 'किनारा'

Tue, 27 Feb 2024 11:13 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
विज्ञापन
विज्ञापन
सतीश पाठक
विज्ञापन

अयोध्या।
समाजवादी पार्टी के टिकट पर दो बार विधानसभा की वैतरणी पार करने वाले बाहुबली अभय सिंह ने मंगलवार को राज्यसभा चुनाव में एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर सपाइयों को चौंका दिया। एक झटके में ही उन्होंने भाजपा की भगवा चादर ओढ़ने के संकेत भी दे दिए।
मूलरूप से महराजगंज थाना क्षेत्र के राजेपुर निवासी अभय सिंह, बैंक अधिकारी रहे भगवान बक्श सिंह के पुत्र हैं। स्नातक की पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा। लखनऊ विश्वविद्यालय में जौनपुर के बाहुबली धनंजय सिंह के साथ दाखिला लिया। यहीं पर एक छात्रनेता पर हमला करने के मामले में अभय सिंह का नाम सामने आया। इसके बाद लखनऊ के चर्चित जेलर हत्याकांड में भी वह सुर्खियों में रहे।
विज्ञापन

बाद में वह पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी के करीबियों में गिने जाने लगे। विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के दौरान मुख्तार से अभय सिंह की बातचीत का ऑडियो भी खूब वायरल हुआ। हालांकि, बाद में उसकी पुष्टि नहीं हो सकी। नब्बे के दशक से अभय सिंह की छवि बाहुबली के रूप में प्रदेश भर में मशहूर हुई। विभिन्न मामलों में वह कई बार जेल भी गए।
2002 में बसपा के टिकट से राजनीति में प्रवेश
वर्ष 2002 में अभय सिंह ने बसपा के टिकट पर अयोध्या विधानसभा से दांव आजमाया। लेकिन भाजपा के कद्दावर नेता लल्लू सिंह से हार गए। इसके बाद 2007 के चुनाव में वह एक मामले में जेल में निरुद्ध थे। उस समय उनकी पत्नी सरिता सिंह ने अपना दल के टिकट पर बीकापुर विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन बसपा के जितेंद्र सिंह बबलू से हार गईं।
2012 में पहली बार बने विधायक
2012 के विधानसभा चुनाव से पहले अभय सिंह की सपा से नजदीकी बढ़ी और पार्टी ने उन्हें गोसाईगंज विधानसभा से प्रत्याशी बनाया। उस समय भी वह जेल में ही थे। जेल से ही उन्होंने चुनाव लड़ा और बसपा प्रत्याशी इंद्रप्रताप तिवारी खब्बू को रिकार्ड मतों से हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। पूर्ण बहुमत में आई सपा सरकार में विधायक बनते ही कुछ समय बाद वह जेल से बाहर आए और राजनीतिक पकड़ मजबूत करते गए। एक-एक कर उन पर लगे कई सरकारी मुकदमे भी वापस हुए। इस तरह वह छात्रनेता से बाहुबली व बाहुबली से राजनेता बन गए। 2017 में भी वह सपा से ही मैदान में उतरे, लेकिन इस बार भाजपा के इंद्रप्रताप तिवारी खब्बू से हार गए। 2022 के चुनाव में तीसरी बार सपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया। इस बार लगभग 15,000 मतों से उन्होंने भाजपा प्रत्याशी आरती तिवारी को पराजित कर दूसरी बार विधानसभा में कदम रखा। सपा के कार्यक्रमों में वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे। उन्होंने किसी को भाजपा से नजदीकियों की भनक तक नहीं लगने दी। सोमवार को राज्यसभा चुनाव से पहले सपा की बैठक में न पहुंचकर उन्होंने सबको चौंका दिया।
बजट सत्र में जय श्रीराम के नारे से शुरू किया था संबोधन
अभय सिंह के भाजपा से नजदीकी की नींव पहले से ही तैयार हो चुकी थी। आठ फरवरी को बजट सत्र के दौरान उन्होंने जय श्रीराम के नारे से संबोधन शुरू किया। स्वयं सूर्यवंशी और भगवान श्रीराम का वंशज होने का तर्क दिया। इसका वीडियो सार्वजनिक हुआ, जो चर्चा में रहा।
फेसबुक पर श्रीरामलला की तस्वीर
अभय सिंह ने मंगलवार की सुबह लगभग आठ बजे ही अपने फेसबुक अकाउंट पर श्रीरामलला की तस्वीर पोस्ट की। साथ में जय रघुनंदन, जय सियाराम, जय श्रीराम लिखा और भगवा ध्वज भी लगाया।
विज्ञापन




अंतरात्मा की आवाज से किया मतदान
हम प्रभु श्रीराम के वंशज हैं। श्रीराम में हमारी आस्था है। लेकिन उनके दर्शन से रोकने के कारण मन बहुत आहत था। इसलिए प्रभु श्रीराम में आस्था रखते हुए अंतरात्मा की आवाज सुनकर हमने मतदान किया है।
-अभय सिंह, विधायक


राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेना है निर्णय
यह जिला नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर का मामला है। इस बारे में कुछ नहीं बोलना है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ही इस पर निर्णय लेंगे।
-पारसनाथ यादव, जिलाध्यक्ष, सपा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें