औरैया। गवाहों के पक्षद्रोही होने से नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म के सात साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने आरोपी को बरी कर दिया।
गवाहों के मुकरने से उस पर आरोप साबित नहीं हो सके। न्यायालय ने वादी के विरुद्ध झूठी सूचना देने पर अलग से मुकदमा चलाने के भी आदेश दिए हैं।
अछल्दा थाना क्षेत्र के गांव निवासी युवक ने नाबालिग बेटी का अपहरण कर दुष्कर्म करने की प्राथमिकी कानपुर देहात निवासी एक रिश्तेदार के खिलाफ दर्ज कराई थी। इसमें कहा था आरोपी युवक उसकी 16 साल की नाबालिग बेटी को तीन सितंबर 2019 को अपहरण कर अपने साथ ले गया और दुष्कर्म किया।
पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद 21 सितंबर 2019 को किशोरी को ढूंढ लिया था। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। साथ ही न्यायालय में उसके विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम अखिलेश्वर प्रसाद के समक्ष 21 अप्रैल को पूरे मामले की सुनवाई चली। सुनवाई के दौरान पीड़िता और वादी दोनों ने ही पक्षद्रोही गवाही दी। इससे अपहरण कर दुष्कर्म का आरोप साबित नहीं हो सका। इस पर न्यायालय ने आरोपी को बरी कर दिया।
न्यायालय ने कहा कि आरोपी जमानत पर है, ऐसे में उसके बंधपत्र निरस्त करते हुए जिला कारागार कन्नौज को भी आदेश की एक प्रति भेजी जाए। साथ ही वादी की तरफ से झूठी सूचना देने पर उसके विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम की धारा 22 के तहत अलग से मुकदमा दर्ज करने के भी आदेश दिए हैं।