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Auraiya News: महिला सर्जन हैं नहीं... कौन कराए सिजेरियन प्रसव

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औरैया। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही। हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने से पहले ही मरीजों को मेडिकल कॉलेज तक भागना पड़ रहा है तो अब महिला सर्जन न होने से गर्भवती के ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं। महिला सर्जन के स्थानांतरण के बाद प्रति माह होने वाले गर्भवती के ऑपरेशन की संख्या तीन गुना तक घट गई है। अस्पताल प्रशासन जल्द सर्जन की नियुक्ति होने की बात कह रहा है लेकिन यहां भर्ती होने के लिए आ रहीं गर्भवती व उनके परिजन परेशानी झेलने को मजबूर हैं।
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जिला अस्पताल के महिला वार्ड में गर्भवती के ऑपरेशन किए जाते हैं। सितंबर माह तक सब ठीक चल रहा था। यहां प्रतिमाह औसत 18 ऑपरेशन हो रहे थे। उसी माह अस्पताल की महिला सर्जन का स्थानांतरण हो गया। सर्जन न होने पर पहले गर्भवती को कुछ दिन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया उसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से महिला सर्जन को बुलाया जाने लगा। प्रसव पीड़ा होने पर सर्जन को कॉल किया जाता है। यदि वह उपलब्ध हैं तो ही ऑपरेशन हो पाता है। इसी व्यवस्था के चलते अक्तूबर माह में महज छह ऑपरेशन हो सके। चूंकि प्रसव पीड़ा होने के बाद इंतजार नहीं किया जा सकता, ऐसे में परिजन गर्भवती को मेडिकल कॉलेज ले जाते हैं या फिर प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराने के लिए मजबूर होते हैं।
सरकारी स्वास्थ्य सेवा बदहाल होने का लाभ प्राइवेट अस्पताल वाले खूब उठा रहे हैं। अस्पताल के बाहर ही मौजूद कुछ लोग गर्भवती के परिजनों को कम पैसाें में ऑपरेशन कराने का झांसा देकर प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करा देते हैं। इसके बाद कुछ न कुछ कारण बताकर अच्छा खासा बिल बना दिया गया। प्राइवेट अस्पतालों में हर ऑपरेशन के लिए 25 हजार रुपये तक वसूले जाते हैं।
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अस्पताल में महिला सर्जन नहीं हैं। सीएमओ ऑफिस कॉल कर सर्जन को बुलाया जाता है। दूसरी सर्जन की नियुक्ति के लिए पत्राचार किया है। जल्द सर्जन मिलने का आश्वासन अधिकारियों से मिला है।
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-डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, सीएमएस
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