औरैया। नये सत्र से कक्षा एक से तीन तक का पाठ्यक्रम बदल जाएगा। मिशन प्रेरणा का नाम भी बदलकर निपुण भारत किया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का काम पोषाहार वितरण के साथ बच्चे को तय मानक के अनुरूप गुणवत्ता परक शिक्षा देना भी होगा।
जिले में 1265 परिषदीय विद्यालयों में लगभग एक लाख 16 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में अभी तक मिशन प्रेरणा के तहत पाठ्यक्रम निर्धारित था। केंद्र सरकार के फरमान पर मिशन प्रेरणा का नाम बदलकर निपुण भारत किया गया है। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी का दर्जा मिला है। इनमें पढ़ने वाले बच्चों को एक से 10 तक के अंकों का ज्ञान कराया जाएगा। साथ ही पांच अक्षर के सरल शब्द पढ़ना सिखाया जाएगा।
इसके लिए बाल वाटिका नाम से नया पाठ्यक्रम तय किया गया है। प्री-प्राइमरी के पीछे का उद्देश्य कक्षा एक में प्रवेश से पहले बच्चे को अंक और अक्षर का ज्ञान कराना है। एक से पांच वर्ष के बच्चों को खेल आधारित शिक्षा देने का प्राविधान किया गया है। निपुण भारत की निगरानी के लिए ब्लाक स्तर पर टास्क फोर्स गठित की जाएगी।
इसके अध्यक्ष खंड शिक्षा अधिकारी होंगे। सीडीपीओ के अलावा भाषा और गणित विशेषज्ञ दो-दो शिक्षक भी टास्क फोर्स में शामिल होंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिक्षक नामित करेंगे। इसके साथ ही जिलाधिकारी की निगरानी में टास्क फोर्स योजना पर नजर रखेगी।