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शिक्षा न बने बोझ, कैंपस में मिलें नौकरियां

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औरैया। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सुरक्षा, बिजली, परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्रदान करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। फिर भी विडंबना है कि जब कभी भी चुनाव नजदीक आता है तो इन्हीं बिंदुओं को लेकर हर बार समस्याएं मुंह खोले क्यों खड़ी रहतीं हैं। कुछ माह बाद ही सूबे में विधानसभा चुनाव होने वाला है। आगामी चुनाव में नए युवा वोटर अपना मतदान करने के लिए उत्साहित हैं।
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युवा मतदाताओं ने बताया कि स्नातक स्तर तक की शिक्षा का भार सरकार को स्वयं वहन करना चाहिए। सरकार निजीकरण करेगी तो सरकारी नौकरी मिलेगी ही नहीं। अगर सरकार को निजीकरण करना ही है तो महाविद्यालयों से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों के कैंपस चयन का प्रबंध कराते हुए प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार नौकरियां प्रदान की भी व्यवस्था बनाई जाए।
रोजगार सृजित करने वाली सरकार होनी चाहिए। जो हर व्यवसायिक शिक्षा के साथ सभी शिक्षित छात्रों को कैंपस स्तर पर ही नौकरियां मुहैया कराए। -उत्कर्ष गुप्ता, बीकॉम तृतीय वर्ष
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विद्यालय में खेल का मैदान तो है, लेकिन यहां खेल से जुड़े संसाधन हर किसी के लिए नहीं हैं। सरकार को खेलों को बढ़ावा देने का इंतजाम करना चाहिए। - अभिषेक सिंह, बीएससी तृतीय वर्ष
शिक्षा व्यवस्था को बेहतर किया जाना चाहिए। ग्रामीण स्तर पर छात्रों के लिए सरकारी हॉस्टल बनवाए जाने चाहिए। जिससे छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। अभिषेक राठौर, आईटीआई, प्रथम वर्ष
कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा का महत्व बढ़ा हैं, लेकिन गरीब छात्रों के लिए अत्याधुनिक मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट जैसी सुविधाएं नहीं हैं, इसके लिए सरकार ध्यान दे। -शिवा चौहान, बीए तृतीय वर्ष
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