जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर जिले के सियासी पारा उफान मार रहा है। समाजवादी पार्टी ने जहां उम्मीदवार घोषित कर दिया है वहीं कांग्रेस और भाजपा ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इस बीच निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने वाले दीपू को भी जोर का झटका धीरे से दिया गया है। नामांकन से ठीक पहले पुलिस ने उनकी फाइल खोद दी है। हालांकि दीपू को आक्सीजन देने वालों में कुछ सपाई ही शामिल बताए जा रहे हैं। फिर भी उन्हें मुंह की खानी पड़ रही है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए 1 जनवरी को नामांकन होना है। 2016 को जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए जाने हैं। सपा ने पहले ही राजवीर यादव को टिकट दे दिया है। वहीं कांग्रेस, भाजपा ने उम्मीदवार उतारने से इनकार कर दिया है।
सपाई दिग्गज राजवीर को निर्विरोध अध्यक्ष बनाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन कभी सपा के झंडाबरदार रहे जिला पंचायत सदस्य दीपू सिंह ने बगावत तक वरिष्ठ नेताओं के दावे की हवा निकाल दी है। दीपू के बागी होने के दूसरे दिन ही उनकी पुरानी फाइल भी खोल दी गई है। हालांकि जिला पंचायत सदस्य दीपू सिंह के भाई दिनेश सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन उनके भाई पर फर्जी तरीके से मुकदमा दर्ज कर रहा है। वह जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन न कर पाए, इस वजह से उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है।
जिपंस पर करीब एक दर्जन हैं पुराने मुकदमे
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर ताल ठोंकने वाले दीपू सिंह ने बुधवार को अपने मिल पर प्रेसवार्ता बुलाई। लेकिन प्रेसवार्ता शुरू होने से पहले ही वहां पुलिस पहुंच गई। अचानक पुलिस देख दीपू सिंह बिना वार्ता किए ही चुपके से निकल गए। जिला पंचायत सदस्य दीपू सिंह पर करीब एक दर्जन मुकदमे दर्ज हैँ। अब उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। दूसरी तरफ दीपू सिंह ने कहा कि उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर नामांकन करने से रोकने के लिए पुलिस की मदद ली जा रही है।