बिजली विभाग में बिलों में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले के खुलासे में हो देर से गड़बड़ी के आसार नजर आने लगे हैं। एक सप्ताह में रिपोर्ट दिए जाने के निर्देशों के बावजूद एक माह से अधिक समय बीत चुका है। इससे जांच अधिकारियों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आने लगी है। सपा सरकार में हुए इस घोटाले के खुलासे के लिए विपक्षी दल आगे आए हैं। बसपाइयों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। वहीं कांग्रेसियों ने सीएम को पत्र लिखे जाने की बात कही है।
घरेलू बिजली बिलों में किए गए करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले में कर्मचारियों के सिर पर तलवार लटकाकर अधिकारियों को बचाने की साजिश अब पूरी तरह से बेनकाब हो जाएगी। सपा सरकार में जिले में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले को समयावधि बीतने के बाद भी जांच प्रक्रिया के लटकने और निर्दोषों को फंसाए जाने का मामला बसपा सुप्रीमो के संज्ञान में पहुंच गया है।
इससे जहां मंडलीय टीम की ओर से की जा रही जांच में देरी पर सवाल खड़े किए गए हैं तो वहीं उच्च स्तरीय जांच समिति से पूरे मामले की जांच कराए जाने की संभावनाएं प्रबल होती दिखाई दे रही हैं। प्रकरण के संज्ञान में आते ही बसपा महासचिव व संसदीय दल के नेता ब्रजेश पाठक का कहना है कि उपभोक्ताओं का शोषण कर करोड़ों रुपये के किए गए घोटाले का यह बड़ा मुद्दा है। इसकी निष्पक्ष जांच कराया जाना जरूरी है।
फिलहाल मामला बहन जी के संज्ञान में दे दिया गया है। जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलती है प्रकरण के खुलासे को अभियान छेड़ा जाएगा। वहीं कांग्रेस के पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी ने बिजली विभाग में हुए इस घोटाले को आम जनता के लिए बहुत ही अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशैली से जनता का अधिकारियों से विश्वास टूटता है।
मामले में कार्रवाई के लिए वह मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसकी उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग करेंगे। वहीं सत्ता पक्ष के प्रदेश सचिव नवीन सक्सेना ने प्रकरण के संज्ञान में आने पर बताया कि यह बहुत ही गलत है। उनकी सरकार में किसी भी कीमत पर उपभोक्ताओं का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। वहीं निर्दोषों को फंसाए जाने की अधिकारियों की मंशा भी पूरी नहीं होने दी जाएगी। वह इस सिलसिले में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात कर इसकी उच्च स्तरीय जांच कराएंगे।