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मंत्री से लेकर अफसरों तक सबने दिया मदद का आश्वास, आस अधूरी

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सिकरोड़ी में खुले में बिस्तर व कपड़े सुखाती महिला। संवाद - फोटो : AURAIYA
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औरैया। यमुना में आई बाढ़ से प्रभावित हुए अजीतमल और सदर तहसील क्षेत्र के 24 गांवों में बेघर हुए पीड़ित मुआवजा और घर मिलने की उम्मीद में खुले में गुजर बसर कर रहे हैं। बाढ़ थमने के बाद गांव लौटे करीब 14 दिन हो गए। इस बीच मंत्रियों से लेकर अफसरों ने पीड़ितों को खूब आश्वासन दिए। एक मंत्री ने तो सभी को पट्टे देने की बात भी कही। लेकिन हकीकत यह है कि गांवों में ठीक से सर्वे भी शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में मुआवजा और घर कब मिलेगा, ये सवाल बाढ़ पीड़ित पूछ रहे हैं।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सीएम योगी आदित्यनाथ ने हवाई दौरा किया था। उन्होंने पीड़ितों को हर संभव राहत देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मंत्री, विधायक और सांसदों ने दौरा कर पीड़ितों को जल्द मदद का भरोसा दिला सुरक्षित स्थान पर बसाने का सपना दिखाया। अफसर से लेकर नेता तक यह कह गए कि जल्द ही प्रशासनिक अधिकारी सर्वे करेंगे और बेघर लोगों को मदद दी जाएगी।
न तो सर्वे हो सका और न ही बेघर लोगों को मदद मिल सकी। हालात यह है कि सिकरोड़ी, बीझलपुर, गोहानी, बड़ेरा, जुहीखा, असेवा, गूंज, फरिहा समेत बाढ़ प्रभावित अन्य गांवों में लोग घरों की मरम्मत तक नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं किसी तरह जुगाड़ कर घर बना लिया तो सर्वे से उनका नाम बाहर न हो जाए। कुछ ग्रामीण छप्पर डालकर बसर कर रहे हैं।
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गंदगी के कारण लोग हो रहे बीमार
बाढ़ प्रभावित गांवों में सफाई अभियान तो चलाया गया लेकिन कुछ गांवों में की गंदगी एक स्थान से हटाकर दूसरी जगह डाल दी गई। लोग दुर्गंध से परेशान हैं। सिकरोड़ी, बीजलपुर आदि गांवों में लोग बुखार से ग्रसित हैं। स्वास्थ्य टीमें लोगों को दवाइयां दे रहीं हैं।
हैंडपंप नहीं लगाए, पेयजल संकट कायम
बीजलपुर के किसान जबर सिंह ने बताया कि गांव में सांसद, मंत्री सब आए। किसानों ने पेयजल संकट और जानवरों के लिए चारा न होने की समस्या बताई थी। हैंडपंप लगवाने और भूसा दिलाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन ये पूरा नहीं हुआ। जिनके घर गिरे हैं, उन्हें कब मुआवजा मिलेगा, यह भी नहीं पता है।
खुले में गुजार रहे रातें
बाढ़ पीड़ित श्याम सिंह ने बताया कि गांव में आज भी लोग परेशानी झेल रहे हैं। सर्वे के नाम पर लेखपाल ने कुछ घरों में जाकर रिपोर्ट तैयार की है। किसे और कब लाभ मिलेगा, यह कोई नहीं बता रहा। मुआवजे की उम्मीद के सहारे खुले आसमान में रात गुजार रहे हैं।
इतने पैसे नहीं कि बनवा सकें मकान
छेदालाल ने बताया कि बाढ़ से उनकी झोपड़ी और घर का कुछ हिस्सा ढह गया। बड़े अधिकारी और मंत्री आए और सुरक्षित स्थान पर आवास दिलाने का भरोसा दे गए। लेकिन आज तक सरकार से कोई मदद नहीं मिली। उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि घर बनवा सकें। झोपड़ी ठीक करने में परिवार जुटा है।
मदद न मिलने से झोपड़ी में रहे लोग
बीजलपुर गांव के जेब सिंह ने बताया कि गांव लौटे करीब 14 दिन हो गए हैं। लेखपाल के साथ तहसील से कुछ लोग आए थे। जिन्होंने टूटे मकान और झोपड़ी देखी। लेकिन मदद नहीं मिल सकी है। मजबूरन परिवार के साथ झोपड़ी में रहना पड़ रहा है।
जल्द मिलेगा मुआवजा
बाढ़ प्रभावित गांवों में सर्वे की प्रक्रिया चल रही है। काफी लोगों के मकान बाद में गिरने की जानकारी मिली है। इसलिए सर्वे में समय लगेगा। सैकड़ों लोगों के मकान क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट बनी है। इसे मुआवजे के लिए भेजा जा रहा है। प्रशासन जल्द पीड़ितों को मुआवजा दिलाएगा।- विजेता, एसडीएम, अजीतमल
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