औरैया। श्रमिकों को रोजगार देने के लिए संचालित मनरेगा योजना में फर्जीवाड़ा अब आम हो गया है। विकास खंड भाग्यनगर की ग्राम पंचायत ऊमरसाना में एक शिकायत पर हुई जांच में मनरेगा लोकपाल रामलक्ष्मी ने आठ जनवरी को घोटाला पकड़ा है।
इससे पहले भी इस शिकायत की जांच हुई थी, लेकिन तब आरोप खारिज कर दिए गए थे। जांच रिपोर्ट आने के बाद अब जिम्मेदारों में खलबली मची हुई है।
ग्राम पंचायत ऊमरसाना निवासी शैलेंद्र कुमार ने तीन अक्तूबर 2025 को एक शिकायत मनरेगा लोकपाल रामलक्ष्मी से की थी। इसमें शिकायतकर्ता ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से लेकर 2024-25 के बीच ग्राम पंचायत में मनरेगा से हुए इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण, मजदूरी और खेतों के समतलीकरण समेत आठ कार्यों को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
मनरेगा लोकपाल ने मामले की जांच के लिए शिकायत बीडीओ भाग्यनगर आदित्य तिवारी को भेजी थी। बीडीओ ने जांच के बाद शिकायत असत्य पाई थी। मामले में इसके बाद शिकायतकर्ता ने जांच से असंतुष्ट होकर 15 नवंबर को मनरेगा लोकपाल से फिर से शिकायत की। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि बीडीओ ने उनके बताए गए कार्यों को देखने के बजाय पंचायत सचिव के बताए गए कार्यों को ही देखा।
इसके बाद मनरेगा लोकपाल रामलक्ष्मी ने आठ जनवरी 2026 को स्वयं गांव पहुंचकर जांच की। इसमें खेत के समतलीकरण में गड़बड़ी पकड़ी गई है। जिस श्रमिक के खेत का समतलीकरण किया गया, उसके खाते में मजदूरी ही नहीं पहुंची है।
इससे साफ हो गया कि समतलीकरण केवल कागजों में ही हुआ है। ऐसा एक नहीं बल्कि कई कामों में किया गया। मनरेगा लोकपाल ने ढाई लाख रुपये के गबन की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है। अब ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक खलबली मची हुई है।
यह है समतलीकरण का नियम
मनरेगा द्वारा उन्हीं लोगों की भूमि का समतलीकरण कराया जाता है, जो मनरेगा जॉबकार्ड धारक हैं। इसके साथ ही यह भी बाध्यता है कि भूमि मालिक श्रमिक भी उस समतलीकरण कार्य में भागीदार होता है। उसके हिस्से की मजदूरी उसके खाते में ही भेजी जाती है।
बीडीओ करते हैं मनरेगा का भुगतान
ग्राम पंचायतों में कराए जाने वाले मनरेगा कार्यों का भुगतान बीडीओ द्वारा किया जाता है। ऐसे में मनरेगा से होने वाले विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायत ने बीडीओ के क्लीनचिट देने और मनरेगा लोकपाल के गबन पकड़ने से तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। ऊमरसाना पंचायत का यह मामला नीचे से ऊपर तक की व्यवस्था की पोल खोल रहा है। इतना ही नहीं बीडीओ ने शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व में की गई जांच से असंतुष्ट होने पर उसे ही पत्र भेजकर विधिक कार्रवाई की चेतावनी भी दे डाली थी।
कुछ जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई हैं, अभी उनका अवलोकन नहीं किया गया है। अगर गबन किया गया है तो वसूली के साथ ही नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी।
-संतकुमार, सीडीओ