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अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों का न सहारा मिला और न स्ट्रेचर

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फोटो 22एयूआरपी17- मरीज को स्वयं इमरजेंसी तक लेकर जातीं महिलायें - फोटो : AURAIYA
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औरैया। कोरोना का डर इस तरह हावी है कि इंसान जिम्मेदारी से भी बच रहा है। 50 शय्या अस्पताल में मरीज को इमरजेंसी तक पहुंचाने के लिए कोई न मिला तो दो महिलाओं ने स्वयं ही मशक्कत कर स्ट्रेचर से मरीज को पहुंचा। लेकिन, मरीज की जान न बचा सकीं।
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गुरुवार की दोपहर लगभग एक बजे 50 शय्या अस्पताल में शहर के मोहल्ला बनारदासी की दो महिलाएं ऑटो से एक गंभीर हालत में मरीज को लेकर पहुंचीं। अस्पताल में लोगों की भीड़ थी, गेट पर उन्हें स्वास्थ्यकर्मी नहीं दिखे। एक महिला इमरजेंसी वार्ड में पहुंची और मरीज की हालत गंभीर होने की बात कह गुहार लगाती रहीं।
चिकित्सक ने आने की बात तो कही, लेकिन कुछ देर होते देख महिला दौड़कर स्ट्रेचर को ऑटो के पास ले गई। बेहोश हो चुके मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाने के लिए आस-पास खड़े लोगों की ओर मदद भरी निगाह से देखने लगी। इसके बाद भी वहां खड़े लोगों के दिल नहीं पसीजे।
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पास खड़े एंबुलेंस की गाड़ियों में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने भी हाथ नहीं लगाया। ऐसे में महिलाओं ने स्वयं ही प्रयास कर मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाया और इमरजेंसी तक लेकर गईं। चिकित्सक ने मरीज का नाम पता दर्ज किया और उसकी हालत को देखते हुए आक्सीजन लगाई, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुका था। आर्थिक रुप से कमजोर महिलाओं को शव को घर ले जाने के लिए भी दिक्कत रही। महिलाओं को रोते देख इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक व स्टाफ ने उनके घर भेजने का इंतजाम किया।
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