बाजार में दुकानों पर बिकने के लिए सजीं विभिन्न प्रकार के रुपों वाली भगवान गणेश की मूर्तियां
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औरैया। गणेश महोत्सव शुक्रवार से शुरू होगा। कोरोना काल के बाद इस बार लोगों में इसको लेकर खासा उत्साह है। घरों में गजानन की मूर्ति स्थापित करने के लिए श्रद्धालुओं ने तैयारियां शुरू कर दीं हैं। बाजार में इकोफ्रेंडली मूर्तियों की मांग अधिक है। मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त दोपहर 12.17 बजे से रात 10 बजे तक है।
बुधवार को लोगों ने बाजार पहुंचकर विविध ढंग से सजीं भगवान गणेश की मूर्तियां खरीदीं। शुभ संयोग में मूर्ति स्थापित करने के लिए पुरोहितों से जानकारी ली। बाजार में इस समय 400 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक की मूर्तियां मौजूद हैं। आचार्य आशुतोष अवस्थी ने बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को शुरू होने वाला यह महापर्व है। इस बार छह ग्रहों का शुभ संयोग बन रहा है। बुध कन्या राशि में, शुक्र तुला राशि में, राहु वृषभ राशि में, शनि मकर राशि में, केतु वृश्चिक राशि तथा शनि मकर राशि में विद्यमान होंगे। यह स्थिति कारोबारियों के लिए शुभ है।
इस तरह करें स्थापना
स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर गणपति का ध्यान करें। एक साफ चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर इस पर गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करें। गंगा जल का छिड़काव करके पूरे स्थान को पवित्र करें। भगवान श्री गणेश को पुष्प की मदद से जल अर्पित करें। इसके बाद लाल रंग का पुष्प, जनेऊ, दूब, पान, सुपारी. लौंग, इलायची, नारियल और मिठाई भगवान को समर्पित करें। गजानन को मोदक अति प्रिय है। उन्हें मोदक का भोग लगाएं। धूप, दीप और अगरबत्ती से आरती करें।