प्रतिकूल मौसम और पूर्वानुमानों के फेल होने से गेहूं उत्पादन को बड़ा झटका लगा है। किसानों की मानें तो मिट्टी में पनपे कीड़ों ने गेहूं की फसल की जड़ों को खाकर उत्पादन में 15 फीसदी की कमी कर दी। वहीं 25 फीसदी फसल बारिश का पूर्वानुमान फेल होने के कारण हुआ। ऐसे में किसानों की बेहतर उत्पादन की उम्मीदें टूट गईं। क्षेत्र के गांवों के किसान गेहूं की फसल का 40 फीसदी उत्पादन गिरने का दावा किया है।
जिले में गेहूं फसल उत्पादन के लिए तीन प्रकार की भौगोलिक स्थिति है। इनमें रिवाइज स्वाइल जो कि ऊंची नीची कृषि भूमि कहलाती है। इसकी मिट्टी में पानी रोकने की शक्ति कम होती है। दूसरा बलुई क्षेत्र जो नदियाें के ऊपर के कृषि क्षेत्र का भाग कहलाता है। तीसरा निचला क्षेत्र जो काली मिट्टी का क्षेत्र है। इस मिट्टी में अधिक दिनों तक पानी रोकने की सबसे अधिक शक्ति होती है। गेहूं उत्पादन के लिए यह मिट्टी सर्वोत्तम मानी गई है।
रिवाइज स्वाइल भूमि उथली होने के कारण सिंचाई के समय जगह-जगह जलभराव के चलते इस क्षेत्र की गेहूं फसल सबसे अधिक प्रभावित होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसका कारण जगह-जगह जल भराव से असमान हुई नमी नेे फसल वृद्धि के समय मिट्टी में कीड़े पैदा कर दिए। इन्हीं कीड़ों ने गेहूं की जड़ों को चट कर दिया। गेहूं की जड़ों में कीड़े लगने से गेहूं की बाली भी प्रभावित हुई। गेहूं की बाली में अपेक्षित दाना न निकलने से उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता देखा जा रहा है।
वहीं गेहूं फसल पकने की अंतिम स्टेज पर पानी की कमी ने भी गेहूं की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है। शस्य विज्ञान विशेषज्ञों ने कीड़े लगने से 15 फीसदी तो बारिश का पुर्वानुमान फेल होने और अंतिम समय पर किसानाें का प्राकृतिक बारिश पर निर्भर होने के कारण 25 फीसदी गेहूं उत्पादन में गिरावट होने का अनुमान लगाया है।
रिवाइज स्वाइल क्षेत्र के गांव दयालपुर, जरुहुलिया, धौरेरा, जनेतपुर, भाऊपुर, भगौतीपुर सरैंया, भीखापुर गांवों के हालात लेेने पर खेतों में कटाई, मड़ाई का काम कर रहे किसानों ने इस बार गेहूं उत्पादन में भारी गिरावट आने की बात कही। ग्राम जरुहुलिया के किसान पप्पू शर्मा, सुधांशु, बाबूराम की माने तो सामान्य स्थिति में 9 से 10 कुंतल प्रति बीघा औसतन उत्पादन के सापेक्ष इस बार खेतों से पांच से छह क्विंटल गेहूं मिल पा रहा है। उक्त गांवों के किसानों ने बताया कि मार्च माह में अचानक बढ़ी गर्मी से गेहूं दाना पतला तो हुआ ही है। वहीं हल्की बूंदा बादी से पांच फीसदी गेहूं दाना काला भी निकल रहा है।
यह है औसत उत्पादन
औरैया। समय से सिंचाई और अनुकूल मौसम पर जिले में गेहूं उत्पादन का औसत 36.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से लेकर अधिकतम 45.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का माना गया है। इस बार प्रतिकूल मौसम और जड़ों में कीड़ों के चलते उत्पादन में गिरावट होेने की आशंका जताई जाने लगी है।
फसल की सिंचाई के समय जड़ों में लगे कीड़ाें ने गेहूं उत्पादन पर खासा प्रभाव डाला है। बारिश के इंतजार में किसानों की शिथिलता और पुर्वानुमान फेल होना भी उत्पादन गिरने का प्रमुख कारण साबित होगा।
डा. संदीप कुमार, विशेषज्ञ शस्य विज्ञान, केवीके परवाहा