औरैया। शहर में ओवरलोड के कारण आएदिन तार टूटने, स्पार्किंग से होने वाली ट्रिपिंग और शटडाउन के कारण बिजली व्यवस्था लड़खड़ाई है। मेंटीनेंस के नाम पर हजारों रुपये खर्च होने के बाद भी उपभोक्ता समस्याओं से जूझ रहे है। समस्या का आज तक स्थायी निदान नहीं हो सका है। जिससे उपभोक्ताओं में बिजली विभाग के प्रति आक्रोश है।
शासन की ओर से जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा हवाहवाई साबित हो रहा हैं। हालत यह है कि आएदिन 24 घंटे में दो-तीन बार अघोषित कटौती होने के साथ ही तार टूटने की समस्या का विभाग के पास कोई भी स्थायी समाधान नहीं है। जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। वहीं मेंटीनेंस के नाम पर रोज ट्रांसफार्मर के फ्यूज वायर, इंसुलेटर बंच केबल के कहीं न कहीं पर लगाए जाने से हर माह हजारों रुपये खर्चा किया जा रहा है।
इसके बाद भी समस्या जस की तस बनी है। अगस्त माह में जिला अस्पताल के पास दो बार बिजली के तार टूटने से बड़ी घटना होते बची। एक बार तार टूटा तो तीन कारें जल गई। उधर समस्या से आजिज उपभोक्ताओं ने विभाग की वसूली पर भी आपत्ति जताई है। कहा कि पहले निर्बाध आपूर्ति देनी चाहिए। फिर दबाव बनाकर वसूली की जानी चाहिए।
शहर में बिजली कटौती की समस्या एक आम बात हो गई है। बिजली अधिकारियों से कहने के बाद भी कोई निदान नहीं हो रहा है, जबकि 24 घंटे बिजली आपूर्ति दिए जाने के निर्देश हैं।
दिनभर में कितनी बार आपूर्ति बंद होती है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। आए दिन तार टूटने की समस्या अभी भी जारी है। ऐसे में मरम्मत के नाम पर दिन में कई-कई बार आपूर्ति बंद की जाती है।
काम के समय बिजली जाने से घर का काम प्रभावित होता है। सुबह पेयजल आपूर्ति के समय ट्रिपिंग होने से ज्यादा दिक्कत होती है। बिजली न आने से पानी की कमी के कारण भटकना पड़ता है।
गृहिणी बबिता ने बताया कि सुबह खाने का काम पूरा होने के बाद दोपहर में घर के जरूरी बिजली से जुड़े काम करने के लिए बैठो तो बिजली बंद मिलती है। जिससे गुस्सा आना स्वाभाविक है।
वर्जन
जरूरत पड़ने पर मेंटीनेंस कराना मजबूरी है। अलग-अलग खर्च बता पाना मुश्किल है। क्योंकि पूरे साल का एक साथ अनुमानित मेंटीनेंस का बजट बनाया जाता है। ऐसे में कभी-कभी काम कराने के दौरान आपूर्ति बंद करानी पड़ती है। फिलहाल हमेशा प्रयास किया जाता है कि कम शट डाउन हों। - विवेक कुमार, जेई बिजली विभाग