औरैया। शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर सौंधेमऊ गांव में स्थापित मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफ) के संचालन को लेकर पालिका प्रशासन असमंजस में है। 15वें वित्त से लोडर के साथ अन्य खरीद के लिए टेंडर करा दिए गए थे। इधर शासन से जारी मशीनों की नई लागत सूची से एक बार फिर खरीद अधर में लटक गई है। इससे शहर के लोगों को अभी कचरे की समस्या और झेलनी होगी।
सौंधेमऊ में लगभग 42 लाख रुपये की लागत से स्थापित एमआरएफ सेंटर को दिसंबर में संचालित कराने के लिए नगर पालिका प्रशासन तेजी से जुटा था। पूर्व में अनुमति के बाद जिलाधिकारी की संस्तुति पर नगर पालिका प्रशासन ने एमआरएफ सेंटर संचालन के लिए जरूरी मशीनरी व अन्य उपकरणों की खरीद का टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली थी। जिसमें कचरा ले जाने के लिए दो लोडर भी खरीद लिए गए थे।
लेकिन कुछ दिन पहले ही शासन ने एक पत्र भेजकर पालिका की धड़कने बढ़ा दीं हैं। शासन से भेजे गए पत्र में एमआरएफ सेंटर पर लगाई जाने वाली मशीनों की लागत निर्धारित करते हुए बजट की संस्तुति दी है। अपशिष्ट के बजन लेने के लिए लगाई जाने वाली मशीन, सूखे कचरे को कन्वेयर बेल्ट पर डालने के लिए मशीन, प्लास्टिक से गंदगी निकालने के लिए लगाई जाने वाली फटका मशीन, प्लास्टिक व अन्य मैटेरियल को अलग-अलग टुकड़ों में करने के लिए लगाई जाने वाली मशीन के अलावा रखरखाव के लिए अन्य सामानों की खरीद के लिए 2.69 लाख रुपये की धनराशि अतिरिक्त रुप से दिए जाने को प्रस्तावित है।
शहर के पवन अवस्थी ने बताया कि शहर में चारों तरफ जगह-जगह कचरों का अंबार लगा है। ऐसे में बार-बार टेंडर प्रक्रिया और शासन के नए-नए फरमान से आम लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है।
लंबे समय से शहर के लोग कचरे के स्थायी निदान की उम्मीद लिए बैठे हैं। लेकिन पालिका प्रशासन कुछ न कुछ बहाना बनाकर लोगों की परेशानी की अनदेखी कर रहा है। लोग परेशान होते हैं।
शासन ने पूर्व में एमआरएफ संचालन के लिए जरूरी मशीनें व उपकरण को खरीदे जाने की संस्तुति की थी। जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया कराकर खरीद भी शुरू कर दी गई। फिर अचानक से नए निर्देश दिए हैं। जिससे फिलहाल दिसंबर तक संचालन हो पाने में मुश्किल हो सकती है। -बलवीर सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद, औरैया।