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सय्या मिले लरकइयां, मैं का करूं गीत पर जमकर झूमे श्रोता

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फोटो19एयूआरपी 10- मालिनी अवस्थी। - फोटो : AURAIYA
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औरैया। प्रदर्शनी पंडाल में गुरुवार रात लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी के लोक गीतों पर जमकर श्रोता झूमे। अंतरराष्ट्रीय कलाकार की प्रस्तुति सुनने को पंडाल में दर्शकों की भारी भीड़ जमा रही।
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जिला प्रशासन के नेतृत्व में पुराना नुमाइश मैदान पर चल रही प्रदर्शनी में गेल (इंडिया) लिमिटेड पाता के सौजन्य से गुरुवार रात फाल्गुनी बहार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय लोक गायिका यश भारती व पद्मश्री सम्मान से विभूषित मालिनी अवस्थी ने कार्यक्रम की शुरुआत भगवान शंकर की स्तुति करते हुए डम डम डमरू बजावे हमार जोगिया गीत से की।
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इसके बाद उन्होंने बन्ने के नैना मैं बारी जाएं, रसिया को नार बनावो री, मैं तो सोय रही सपने में मोहे रंग डालो नंदलाल, आज बिरज में होरी मेरे रसिया, नदी नारे न जाओ श्याम पैंय्या परूं, जमुना पार की गुजरिया नैना मार के चली, चलत मुसाफिर मोहि लिओ री पिंजरे वाली मुनियां, छोटे से नन्हें से बालम हमका मिले छोटे से, रेलिया बैरन पिया को लिए जाय ये जैसे लोकगीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में सुनाया गया सुप्रसिद्ध लोकगीत सैय्यां मिले लरकइयां मैं क्या करूं गीत पर कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से पंडाल गुंजायमान हो गया।
उन्होंने देवकली मंदिर स्थित महादेव शिव शंकर व कुदरकोट जहां महायोगी भगवान कृष्ण ने रूक्मिणी का हरण कर वरण किया था, जैसे देव स्थानों का जिक्र कर औरैया की धार्मिक ऐतिहासिक धरोहर भी वर्णन किया। जिलाधिकारी ने लोक गायिका मालिनी अवस्थी को उनकी व उनके पति अवनीश अवस्थी की तस्वीर देकर सम्मानित किया।
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