औरैया। राष्ट्रीय पंचायतीराज दिवस पर सूबे के मुख्यमंत्री ने ग्राम सचिवालयों को हरहाल में संचालित कर ग्रामीणों के काम वहीं से कराए जाने का फरमान दिया है।
सरकार सचिवालयों और ग्राम पंचायत को विकास की धुरी मान रही है। इधर जिले में इनके संचालन को लेकर अधिकारी बजट का दुखड़ा रो रहे हैं। जिन पंचायत भवनों को सचिवालय के रूप में संतृप्त दिखाया गया है वह कागजों में ही संचालित हो रहे हैं।
जिले की 477 ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय संचालित किए जाने हैं। 458 में पंचायत भवन/सचिवालय बन कर तैयार होने का दावा कर रहा है।
जबकि 19 ऐसी ग्राम पंचायतें है, जिनमें 15 पंचायतों में भवन निर्माण के लिए जगह नहीं है, जबकि चार में विवाद बताया जा रहा है। इसके साथ ही 153 ग्राम पंचायतों में विभाग पूरी तरह से सचिवालय संचालित होने का दावा विभाग कर रहा है।
संचालित होने वाले सचिवालयों के आंकड़े पोर्टल और विभागीय वेबसाइट पर अपलोड है, लेकिन हकीकत में इन पर भी ताले लटके हुए हैं। शेष पंचायत भवनों को लेकर विभाग ग्राम प्रधान निधि व 15वें वित्त में बजट न होने का दुखड़ा रो रहा है।
14 पंचायत सहायक दे चुके इस्तीफा
जिले की 426 ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों की नियुक्ति की जा चुकी है। इनमें से समय से मानदेय न मिलने व काम न लिए जाने पर 14 पंचायत सहायकों ने इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ दी है। इस पर विभाग भी चुप्पी साधे हुए हैं।
पौने दो लाख रुपये से होनी है खरीद
पंचायत सचिवालय के संचालन के लिए ग्राम पंचायत निधि व 15वें वित्त से एक लाख 75 हजार रुपये की धनराशि से कुर्सी, कंप्यूटर, अलमारी, सोलर पैनल, बैटरी, इनर्वटर, पंखा, डेस्क टॉप, यूपीएस, प्रिंटर एवं वेबकैम, सीसीटीवी कैमरा आदि वस्तुओं की खरीद होनी है।
ब्लॉक वार संतृप्त पंचायत भवन एक नजर में
ब्लॉक ग्राम पंचायत संतृप्त
अछल्दा 61 18
अजीतमल 68 39
औरैया 95 19
भाग्यनगर 73 34
सहार 65 26
बिधूना 69 07
एरवाकटरा 46 10
बोले जिम्मेदार...
अधिकांश ग्राम पंचायतों में बजट के अभाव में पंचायत घरों का सामान नहीं खरीदा जा सका है। इसके लिए शासन से बजट की मांग की गई है। ग्राम पंचायतों में बजट मिलते ही सचिवालय संचालित कराए जाएंगे। - संदीप कुमार वर्मा, डीपीआरओ
फोटो-25एयूआरपी-22- बिधूना ब्लाक के बरुआ का संचालित सचिवालय। संवाद- फोटो : AURAIYA