फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे अस्पताल

विज्ञापन
फोटो-15एयूआरपी-6- अयाना अस्पताल में रखे बेड व आक्सीजन कंसट्रेटर। संवाद - फोटो : AURAIYA
विज्ञापन
औरैया। जिले के अस्पतालों में लोगों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। डॉक्टर और विशेषज्ञों की कमी के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में उपलब्ध संसाधनों का लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है। हालात यह है कि आठ बाल रोग विशेषज्ञों के सापेक्ष सिर्फ दो की ही नियुक्ति है। जिला अस्पताल में केवल एक एनस्थेटिस्ट ही है। बिधूना सीएचसी में कुल स्वीकृत 102 पदों में 63 पद रिक्त हैं। कमोबेश स्थिति अधिकांश अस्पतालों की है। कोविड संक्रमण से निपटने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए बनाए गए पीकू वार्ड, आईसीयू, वेंटिलेटर वार्ड शोपीस बने हुए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर जनप्रतिनिधियों ने अस्पतालों को गोद तो ले लिया, लेकिन इनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
विज्ञापन

कोरोना काल के बाद से ही जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के संसाधन बढ़ाए जाने का दम स्वास्थ्य विभाग भर रहा है। इसके बावजूद शासन और प्रशासन चिकित्सकों और कर्मचारियों की संख्या को नहीं बढ़ा सका। शहर के 100 शैया, 50 शैया अस्पताल समेत दिबियापुर स्वास्थ्य केंद्र, अजीतमल के अयाना, बेला, अछल्दा में एलटू वार्ड बनाए जाने के साथ ही ऑक्सीजन वार्ड की व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद संचालन के लिए विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो सकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग कोविड से निपटने के लिए छह-छह डॉक्टर रखे जाने की बात कह रहा है। बाल रोग विशेषज्ञों की जरूरत पर जूम एप से सलाह देने और हालत बिगड़ने पर 100 शैया अस्पताल रेफर किए जाने की व्यवस्था की गई है।
शोपीस बने एल-वन प्लस अस्पताल
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए 100 शैया अस्पताल के साथ ही दिबियापुर, अयाना, अछल्दा, बेला में एल वन प्लस अस्पताल बनाए गए। एल-वन प्लस अस्पताल में 26-26 कन्संट्रेटर और 10 बेडों की ही व्यवस्था है। यहां पर स्वास्थ्य विभाग ने ऑक्सीजन कन्संट्रेटर, बाइपैप की व्यवस्था करने की बात कही है। इन अस्पतालों में अभी विशेषज्ञों की कमी है।
विज्ञापन

गोद लेकर भूल गए जनप्रतिनिधि
स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो, इसके लिए प्रदेश सरकार ने जिले के जनप्रतिनिधियों को अस्पताल गोद लेने के निर्देश दिए थे। इनमें से एरवाकटरा स्वास्थ्य केंद्र को राज्यसभा सांसद गीता शाक्य, अजीतमल अस्पताल को ब्लॉक प्रमुख रजनीश पांडेय, दिबियापुर को कृषि मंत्री लाखन सिंह राजपूत, बिधूना को विधायक विनय शाक्य, अछल्दा सीएचसी को सांसद रामशंकर कठेरिया, अयाना को सौरभ भूषण शर्मा ने गोद लिया है। जनप्रतिनिधियों ने अस्पतालों को गोद लेकर कुछ संसाधन भी निधि से मुहैया कराए, लेकिन डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
डॉक्टरों की स्थिति
लेवल-एक- 56 स्वीकृत- 14 रिक्त
लेवल-दो- 8 स्वीकृत- 13 कार्यरत (पांच अधिक)
लेवल-तीन- 14 स्वीकृत- नौ रिक्त
लेवल-चार- 13 स्वीकृत- 11 रिक्त
बाल रोग विशेषज्ञ- आठ स्वीकृत- छह रिक्त
जिम्मेदार बोलीं
वेंटिलेटर चलाने के लिए जिला अस्पताल में एक एनेस्थेटिस्ट की तैनाती है। इसके साथ ही टेक्नीशियनों को प्रशिक्षण दिया गया है। कोविड संक्रमण से निपटने के लिए संविदा पर कुछ डॉक्टर रखे गए हैं। जिन्हें भी ट्रेनिंग दी गई है। जिले में डॉक्टरों की कमी को लेकर शासन से पत्राचार किया गया है।
विज्ञापन

-डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें