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कोल्ड स्टोरेज में 2320 मीट्रिक टन आलू डंप

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औरैया। महंगाई से निपटने के लिए प्रशासन ने 31 अक्तूबर तक सभी कोल्ड स्टोरेज संचालकों को स्टोरेज खाली करने के निर्देश दिए हैं। अंतिम दिन भी जिले के अधिकांश कोल्ड स्टोरेज खाली नहीं हो सके हैं। अभी भी 2320 मीट्रिक टन आलू डंप है। पांच से छह फीसदी आलू जिले के 14 कोल्ड स्टोरेज में पड़ा है। किसानों का कहना है कि अभी धान की कटाई शुरू नहीं हुई है। ऐसे में यदि आलू निकाल लिया तो उनका बीज खराब होने की आशंका है।
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इस बार जिले में आलू की फसल पिछले वर्ष की तुलना में खराब रही थी। बुवाई बाद बारिश होने से आलू की फसल में बड़े पैमाने पर रोग लग गया था। जिसका असर आलू के पैदावार पर पड़ी। किसानों का कहना है कि एक बीघा आलू की फसल में करीब 150 बोरे की पैदावार होती थी। इस बार मुश्किल से 50 बोरे की पैदावार हो सकी, जबकि एक बीघा की लागत करीब 40 हजार रुपये आती है। आलू के महंगे होने का प्रमुख कारण आलू का पैदावार कम होना भी है। इसी कारण इस वर्ष कोल्ड स्टोरेज भी बड़ी मुश्किल से 50 फीसदी ही भर सके। ऊपर से कोल्ड स्टोरेज में प्रति पैकेट 110 रुपये किराया, ट्रैक्टर भाड़ा अलग से देना पड़ता है।
आलू भंडारण के समय रेट 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल थे। वर्तमान में थोक रेट 2800 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल है। आलू की महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने 31 अक्तूबर तक सभी कोल्ड स्टोरेज खाली करने के निर्देश दिए थे, जबकि जिले के अधिकांश कोल्ड स्टोरेज में आलू पड़ा है।
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