प्रसिद्ध कार्टून करेक्टर मोगली को कौन नहीं जानता। बघीरा और मोगली की शरारतों पर लिखी किताब 'जंगल बुक' बच्चों में काफी लोकप्रिय है। इसका टाइटल सॉन्ग 'जंगल जंगल बात चली है पता चला है अरे पता चला है...' कभी हर बच्चे की जुबान पर होता था।
क्या आप जानते हैं कि 'जंगल बुक' इलाहाबाद में उसी जगह पर लिखी गई, जहां पर आजकल महाकुंभ का मेला चल रहा है। विदेशी लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने इसे उन दिनों लिखा, जब वो इलाहाबाद यूनिर्वसिटी में थे।
'जंगल बुक' के लेखक रुडयार्ड किपलिंग का इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पास कभी एक मकान हुआ करता था, जहां वे कोई दो साल तक रहे। उनके घर की जगह अब सिर्फ एक दीवार का टुकड़ा और कुछ बिखरी ईंटें पड़ी हैं। यह जगह कमोबेश झाड़ झंखाड़ के जंगल में तब्दील होती जा रही है।
हैरत की बात है कि इस जगह के बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं। बहुत कम लोगों को पता होगा कि रूडयार्ड किपलिंग ने इलाहाबाद यूनीवर्सिटी से अलग अपनी जिंदगी के दो साल गुजारे थे। जंगल बुक लिखकर किपलिंग ने अपने कैरेक्टर मोगली को दुनिया भर में न सिर्फ प्रसिद्ध किया, बल्कि मोगली भारत का पहला वैश्विक कार्टून ब्रांड बना। अभी भी मोगली को जानने वाले काफी लोग मिल जाएंगे। देश की एक पीढ़ी जंगलबुक देखकर जवान हुई है। किसे नहीं याद होगी मोगली और बघीरा की शरारतें।