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किस हथियार से हुई आरुषि की हत्या?

Wed, 30 Oct 2013 08:30 AM IST
अमर उजाला/गाजियाबाद
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चर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस में अपनी फाइनल बहस के तीसरे दिन डिफेंस ने यूपी पुलिस और सीबीआई की थ्योरी पर सवाल उठाया। डिफेंस का कहना था कि इस दोहरे हत्याकांड में सीबीआई आज तक उस हथियार को ही तय नहीं कर सकी है, जिससे हत्या हुईं।
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सीबीआई द्वारा गोल्फ स्टिक के वार से हत्या होने के मामले में भी डिफेंस ने सीबीआई कार्रवाई को कटघरे में खड़ा कर दिया। बाकी कार्यवाही के लिए विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने अब 30 अक्तूबर की तारीख नियत की है।

डिफेंस के अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर और मनोज शिशौदिया का कहना था कि यूपी पुलिस ने आरुषि-हेमराज की हत्या हथौडे़ और चाकू से होना बताया था। बाद में सीबीआई ने यूपी पुलिस की इस दलील को सिरे से नकार दिया था।
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सीबीआई ने इस मामले में गोल्फ स्टिक, खुखरी और सर्जिकल ब्लेड का प्रयुक्त होना बताया। बचाव पक्ष का कहना था कि पहली बार 2009 में सीबीआई ने गोल्फ स्टिक तलवार दंपति से मांगी थी।

इसके अगले ही दिन राजेश तलवार ने अपने क्लीनिक पर बुलाकर सीबीआई इंस्पेक्टर रिछपाल सिंह को गोल्फ स्टिक सौंप दी थीं। मौके पर ही उन्हें सील कर दिया गया था।

सीबीआई का कहना था कि हत्या 3 और 5 नंबर की गोल्फ स्टिक से हुई हैं, क्योंकि जांच के बाद इन दोनों स्टिक पर मिट्टी कम पाई गई है। बाद में जब गोल्फ स्टिक लैब में जांच को भेजी गईं तो वहां से आई रिपोर्ट भी चौंकाने वाली थी। रिपोर्ट में 3 और 6 नंबर की स्टिक पर मिट्टी का कम होना बताया गया था।

डिफेंस का कहना था कि एक लैब से दूसरी लैब ले जाते समय भी स्टिक से मिट्टी कम हो सकती है। डिफेंस ने सीबीआई के स्वतंत्र गवाह लक्ष्मण सिंह के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें उसने कहा था कि ड्राइवर उमेश ने उसके सामने ही दोनों गोल्फ स्टिक को पहचाना था।

डिफेंस का तर्क था कि जब 2009 में ही गोल्फ स्टिक सील कर दी गईं और इसके बाद पहली बार 2013 में उन्हें कोर्ट के समक्ष खोली गईं तब 2 अगस्त 2010 को लक्ष्मण के सामने उमेश को वह गोल्फ स्टिक भला किस प्रकार दिखा दी गईं।
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