आरुषि-हेमराज हत्याकांड के मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी डॉ. राजेश तलवार को नसीहत दी है कि वह हर एक मामले को लेकर उच्च अदालतों में न आएं। इसका परिणाम उनके खिलाफ भी जा सकता है।
बेहतर हो कि ट्रायल कोर्ट को अपना काम करने दें। उनको अपनी शिकायत रखने का मौका ट्रायल कोर्ट का निर्णय आने के बाद भी मिल सकता है। डा. तलवार की याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल सुनवाई कर रहे हैं।
याची के अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कहा कि याची को खुद को बेकसूर साबित करने में वैज्ञानिक परीक्षण की रिपोर्ट सहायक हो सकती हैं। इसलिए बचाव पक्ष को विचारण के दौरान उनको सामने लाने का अधिकार है।
न्यायालय का मत था कि जिन दस्तावेजों की साक्ष्य के तौर पर ग्राह्यता नहीं है उनको मांगने का कोई औचित्य भी नहीं है क्योंकि इससे किसी पक्ष को कोई लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि कोर्ट डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट, सीडीआर और साउंड सिम्युलेशन टेस्ट की रिपोर्ट बचाव पक्ष को दिए जाने पर सहमत थी।
डॉ. तलवार के वकील का तर्क था कि डीएनए रिपोर्ट पर उनको विशेषज्ञ की राय लेने का मौका मिलना चाहिए। तभी वह डीएनए रिपोर्ट और उसे तैयार करने वाले डॉ. महापात्रा का प्रति परीक्षण कर सकेंगे।
सीबीआई ने इसका विरोध किया कि डॉ. महापात्रा का परीक्षण न्यायालय में हो चुका है उस वक्त बचाव पक्ष ने प्रति परीक्षा नहीं की।
कोर्ट इस बात से सहमत थी कि डीएनए विशेषज्ञ की प्रतिपरीक्षा सामान्य लोगों द्वारा नहीं की जा सकती है इसलिए बचाव पक्ष को विशेषज्ञ की सलाह लेने का मौका मिलना चाहिए।
कोर्ट ने सीबीआई को ऐसा कानूनी प्रावधान बताने के लिए कहा है जिसके अनुसार बचाव पक्ष को इस प्रकार का अवसर नहीं दिया जा सकता है।