समाजसेवी अन्ना हजारे मात्र 26 वर्ष की आयु में आत्महत्या करने वाले थे। उत्तरप्रदेश के बागपत जनपद में जनतंत्र यात्रा के दौरान उन्होंने खुद इस किस्से को सुनाया। बकौल अन्ना, उस समय मन निराशा में डूब चुका था।
मैंने सोचा, सब कहते हैं हर चीज मेरी है, लेकिन हाथ में कुछ भी नहीं। तब मैं 26 साल का था। मैंने सोचा, क्यों न आत्महत्या कर लूं, लेकिन तभी स्वामी विवेकानंद की किताब पढ़ी। इसी से जीवन बदल गया।
जीवन का मकसद है सेवा करना। मैंने संकल्प लिया जनसेवा का। मैंने शादी नहीं की। लोगों ने सोचा कि इसका परिवार छोटा है, लेकिन आप सब लोग (बच्चों की ओर इशारा करते हुए) मेरा परिवार ही तो हैं।
राहुल और मोदी सत्ता के स्वार्थी : अन्ना
लोकसभा चुनाव-2014 के लिए प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट किए जा रहे कांग्रेस के राहुल गांधी और भाजपा के नरेन्द्र मोदी को समाजसेवी अन्ना हजारे ने सत्ता का स्वार्थी करार दिया है। उनका कहना है कि दोनों ही नेता सत्ता पाने के लिए दौड़ रहे हैं।
मीडिया का चश्मा बदला
कम होती भीड़ के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में अन्ना बोले कि मीडिया का चश्मा बदल गया है, वरना भ्रष्टाचार के खिलाफ लोग वैसे ही जोश में है, जैसे जनलोकपाल के लिए हुए आंदोलन के समय थे।
केजरीवाल का रास्ता अलग
आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल पर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि लोकशाही में सभी को पार्टी बनाने का अधिकार है लेकिन उनका और हमारा रास्ता अलग-अलग है।
अन्ना की तबीयत बिगड़ी
सिंघावली अहीर स्थित कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज में जनसभा के लिए जाते समय अन्ना हजारे की तबीयत बिगड़ गई। इसके चलते यहां वे गाड़ी से नहीं उतरे। यात्रा के संयोजक कृष्णपाल सिंह और राशिद ने बताया कि अन्ना आगे का कार्यक्रम छोड़ डाक्टर के पास नोएडा चले गए।
रक्षा सौदे के लिए पारदर्शी नीति बने : वीके सिंह
पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह का कहना है कि रक्षा सौदों को लेकर जिस तरह बार बार आरोप लग रहे हैं, उसे देखते हुए सरकार को हथियार खरीद की पारदर्शी नीति बनानी चाहिए।
उन्होंने ये बातें मीडिया से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे के पीछे आज भी पूरा देश है। लोग भ्रष्ट व्यवस्था से तंग आ चुके हैं। व्यवस्था परिवर्तन होकर रहेगा।