यूक्रेन का बॉर्डर पार कर रोमानिया पहुंचे अमरोहा के कई समेत हजारों छात्र एयरपोर्ट के आसपास शेल्टर होम में ठहरे हुए हैं। दो दिन बाद में अंशिका और अभय पवार को फ्लाइट नहीं मिल सकी है। यहां ठंड भी अपना कहर बरपा रही है। रात तापमान माइनस 6 डिग्री तक पहुंच रहा है। दिन में भी बर्फबारी हो रही है। लुढ़कते तापमान के चलते छात्रों की हालत बिगड़ रही है। छात्रों के बीच पहुंचकर भारतीय दूतावास से जुड़े अधिकारी उनका हाल जान रहे हैं। वहीं मंगलवार की शाम अंशिका और उनके साथी छात्रों का पासपोर्ट नंबर भारतीय दूतावास ने ले लिया है। अब जल्द की प्लाइट मिल सकती है।
रोमानिया एयरपोर्ट के पास शेल्टर होम में मौजूद जोया निवासी अंशिका ने बताया कि यूक्रेन बॉर्डर पार करने के बाद छात्रों को रोमानिया एयरपोर्ट के आसपास रोका जा रहा है। यहां छात्रों को अच्छी सुविधाएं दी जा रही है। सेहत बिगड़ने पर छात्रों को दवाइयां भी मिल रही हैं। लेकिन दो दिन से फ्लाइट नहीं मिलने के कारण बेहद दिक्कत हो रही है। अच्छी बात यह है कि रविवार की सुबह यूक्रेन पुलिस की बर्बरता का शिकार हुए उनके सभी 97 साथी सकुशल रोमानिया पहुंच गए है। खुद का स्वास्थ्य गड़बड़ बता रहीं अंशिका घर पहुंचने की बाट संजोए बैठी हैं। उन्होंने बताया कि यहां छात्रों के लिए अच्छी सहूलियत दी गई है। भारतीय दूतावास से जुड़े अधिकारी छात्रों के बीच पहुंचकर उनका हाल पूछ रहे हैं। साथ ही दूतावास से जुड़े अधिकारियों ने उनका और उनके साथ ठहरे छात्रों के पासपोर्ट नंबरों की लिस्ट बनाकर मंगा ली है। जिससे लग रहा है कि जल्द उन्हें फ्लाइट मिल सकती है। इसके बाद स्वदेश लौट सकेंगी।
वहीं डिडौली क्षेत्र के कटाई गांव निवासी अभय पवार भी रोमानिया एयरपोर्ट के पास शेल्टर होम में ठहरे हुए हैं। उन्होंने बताया कि फ्लाइट मिलते ही वह स्वदेश लौट आएंगे। अमरोहा नगर के मोहल्ला दानिशमंदन निवासी शाह कमाल को हंगरी के एंट्री नहीं मिल सकी है। उनके पिता डॉक्टर जमशेद कुमार ने बताया कि शाह कमाल तीन दिन से हंगरी बॉर्डर से दो किलोमीटर पहले ठहरे हुए थे। लेकिन बॉर्डर पर भीड़ होने के कारण उन्हें हंगरी के लिए एंट्री नहीं मिल सकी, जिस कारण वह अपने 15 साथियों के साथ मंगलवार की सुबह स्लोवाकिया बॉर्डर पर पहुंचे। यहां से सकुशल स्लोवाकिया में एंट्री मिल गई है। यहां से वह जल्द ही स्वदेश लोटेंगे। वहीं आवास विकास द्वितीय निवासी महफूज हसन ने बताया कि उनके बेटे मारूफ हसन हंगरी पहुंच चुके हैं।