अमरोहा। आयकर दाताओं के लिए सरलीकरण, आसान अनुपालन और अधिक लाभ देने के उद्देश्य से सरकार ने 64 वर्ष पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह नया आयकर अधिनियम 2025 लागू करने की घोषणा की है। यह नया कानून एक अप्रैल से प्रभावी होगा, जिसे टैक्स ईयर 2026-27 के रूप में जाना जाएगा।
जिला टैक्स बार एसोसिएशन अमरोहा के सचिव अमित खंडेलवाल एडवोकेट ने बताया कि नया आयकर अधिनियम करदाताओं के लिए अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक साबित होगा। नए आयकर कानून का मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना, अनावश्यक प्रावधानों को हटाना और मुकदमेबाजी को कम करना है। पुराने आयकर अधिनियम में 819 धाराएं थीं, जिन्हें घटाकर नए कानून में 536 कर दिया गया है। इसी तरह शब्दों की संख्या भी करीब 5.12 लाख से घटाकर 2.60 लाख कर दी गई है। जटिल भाषा और 1200 से अधिक प्रावधानों व 900 व्याख्याओं को हटाकर कानून को सरल और स्पष्ट बनाया गया है। नई व्यवस्था में पूर्व वर्ष और निर्धारण वर्ष की जगह केवल टैक्स ईयर की अवधारणा लागू की गई है, जिससे गणना और रिटर्न फाइलिंग में भ्रम खत्म होगा। नई कर व्यवस्था को डिफॉल्ट बनाया गया है, हालांकि पुरानी व्यवस्था का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। नई टैक्स स्लैब के अनुसार 4 लाख तक की आय पर कोई कर नहीं लगेगा। 4 से 8 लाख तक 5 प्रतिशत, 8 से 12 लाख तक 10 प्रतिशत, 12 से 16 लाख तक 15 प्रतिशत, 16 से 20 लाख तक 20 प्रतिशत, 20 से 24 लाख तक 25 प्रतिशत और 24 लाख से अधिक आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा। रिबेट के साथ 12 लाख तक की आय पर टैक्स शून्य रहेगा, जबकि वेतनभोगियों के लिए 75 हजार के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ 12.75 लाख तक आय टैक्स-फ्री हो सकती है। आईटीआर फाइलिंग की अंतिम तिथियों में भी बदलाव किया गया है। आईटीआर-एक और आईटीआर-दो के लिए 31 जुलाई, आईटीआर-तीन और आईटीआर-चार के लिए 31 अगस्त तथा ऑडिट मामलों के लिए 31 अक्टूबर अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। साथ ही रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा को दो वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष कर दिया गया है। नए कानून में टीडीएस/टीसीएस की दरों और सीमाओं को एक ही टेबल में समाहित किया गया है, जिससे प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बनेगी। कैपिटल गेन और वर्चुअल डिजिटल एसेट (क्रिप्टो) से जुड़े प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है। छोटे व्यापारियों के लिए प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन की सीमा बढ़ाई गई है।