गांवों में जल सहेजने के साथ पिकनिक स्पॉट के रूप में तालाबों का सौंदर्यीकरण किया गया था। जिलेभर में इसके लिए करोड़ों रुपये भी खर्च किए गए, लेकिन अमृत सराेवर के रूप में तैयार हुए इन तालाबों की दशा में कोई सुधार नहीं हो सका है। जिले में अधिकांश अमृत सरोवर गंदगी से अटे हैं।
ग्रामीण इलाकों में बदहाल हो चुके तालाबों को संरक्षित किए जाने और इन्हें अमृत सरोवरों का रूप दिए जाने की कवायद शुरू की गई थी। मनरेगा के तहत इन तालाबों पर काम कराया गया। जल संरक्षण के साथ यहां साफ-सफाई और बैठने की व्यवस्था के साथ हरियाली के लिए पेड़ लगाए गए थे। कुछ तालाबों के किनारे जगह अधिक होने के कारण वहां पिकनिक स्पाॅट के रूप में बच्चों के खेलने के लिए झूलों की भी व्यवस्था की गई थी।
हालांकि, जिलेभर में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भी तालाबों की दशा में कोई सुधार नहीं हो सका। इनमें कई तालाब ऐसे भी हैं, जिनमें पानी ही नहीं है। कुल मिलाकर करोड़ों रुपये बहाने के बाद भी इन तालाबों के स्वरूप में तो बदलाव हुआ, लेकिन इनकी दशा नहीं सुधर सकी है।
जिलेभर में हैं 245 अमृत सरोवर
राजस्व अभिलेखों के अनुसार जिले में करीब पांच हजार तालाब हैं। लेकिन, इनमें से 245 तालाबों को अमृत सरोवरों के रूप में तैयार किया गया है। मनरेगा योजना के तहत इन तालाबों के जीर्णोद्धार का काम कराया गया था। जिसमें तालाब की बाउंड्री के अलावा कई अन्य काम कराए गए थे। इनमें इनलेट द्वारा गांव का पानी तालाब में पहुंचाने के साथ इंटर लॉकिंग भी कराई जाती है। कम एरिया के तालाब पर कम से कम तीन लाख और बड़े एरिया के तालाबों पर यह खर्च दस लाख रुपये तक पहुंच सकता है, लेकिन इसके बाद भी इन तालाबों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
अमरोहा का पनबाड़ी तालाब
शहर में बिजनौर रोड स्थित पनबाड़ी तालाब का दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। इसके अलावा कई तालाबों को मिट्टी डालकर पाट दिया गया। बिजनौर रोड स्थित पनबाड़ी तालाब को अमृत सरोवर के रूप में तैयार करने की कवायद शुरू की गई थी। जिसके लिए भूमि पूजन भी कर लिया गया था, लेकिन तालाब के जीर्णोद्धार की कवायद पूरी न हो सकी। इसके उलट भूमाफिया तालाब की जमीन पर कब्जा करते चले गए। अभी भी तालाब के बड़े एरिया पर भूमाफिया का कब्जा है।
नारंगपुर का अमृत सरोवर
जोया ब्लॉक के गांव नारंगपुर स्थित अमृत सरोवर को तैयार करने में मनरेगा की ओर से बड़ी रकम खर्च की गई, लेकिन वर्तमान में तालाब बदहाल स्थिति में है। यहां ग्रामीणों ने तालाब की भूमि पर उपले बनाकर बिटोरे तैयार कर लिए। इसके अलावा यहां झाड़ियां और घास खड़ी हैं। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी इसका कोई लाभ ग्रामीणों को मिलता नहीं दिख रहा है।
चोटीपुरा का अमृत सरोवर
जोया ब्लॉक के ही गांव चोटीपुरा में लाखों रुपये खर्च कर अमृत सरोवर तैयार किया गया था। तालाब की बाउंड्री के साथ ही गेट भी बनाया गया। लेकिन यहां भी सफाई का अभाव है। तालाब में जल संचयन भी नहीं होता है।
सरकड़ी अजीज का अमृत सरोवर
सरकड़ी अजीज में भी लाखों रुपये खर्च कर अमृत सरोवर तैयार किया गया, लेकिन इस सरोवर की भी स्थिति बदहाल हैं। सफाई का अभाव तो है ही साथ ही तालाब की जमीन पर जल संचय नहीं होता। ग्रामीणों द्वारा तालाब की जमीन पर उपले तैयार करने का काम किया जाता है।
- सभी अमृत सरोवरों को साफ-सुथरा रखने के निर्देश दिए गए हैं। अगर कहीं गंदगी और सफाई का अभाव है, तो वहां सफाई कराई जाएगी।
- अमरेंद्र प्रताप सिंह, परियोजना निदेशक