हसनपुर। कुत्ते अथवा गीदड़ के काटने पर रैबीज से बचने के लिए वैक्सीन की सभी डोज लगवाना बेहद जरूरी है। इसमें लापरवाही जान पर भारी भी पड़ सकती है। क्षेत्र के गांव गरगज में शनिवार को 21 वर्षीय ओमकार की रैबीज से हुई दर्दनाक मौत इसका ही एक उदाहरण है।
जानकारी का अभाव व सीएचसी कर्मियों की लापरवाही से ओमकार की जान पर बन आई। सात माह पहले ओमकार को गीदड़ ने काट लिया था। परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रहरा पर एंटी-रैबीज वैक्सीन की तीन डोज लगाई गई थीं। लेकिन इसके बाद भी ओमकार रैबीज का शिकार हो गया। परिजनों का कहना है उन्हें कभी भी पांच डोज के बारे में नहीं बताया गया।
ओमकार के परिजनों में इस समय दुख और गुस्सा है। उनका कहना है कि अगर उन्हें सही जानकारी दी गई होती, तो शायद आज ओमकार जिंदा होता। यह घटना स्वास्थ्य विभाग के उन जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिनकी जिम्मेदारी नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी सही और पूरी जानकारी देना है। संवाद